Begusarai Flood News : गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने बछवाड़ा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. दादूपुर, बिशनपुर, चमथा-1, चमथा-2 और चमथा-3 पंचायतों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है. खेत, खलिहान, सड़कें और चरागाह जलमग्न होने लगे हैं, जबकि कई जगहों पर बाढ़ का पानी लोगों के घरों तक पहुंचने लगा है. सबसे बड़ी चिंता मवेशियों के लिए चारे की किल्लत को लेकर है. कृषि और पशुपालन पर निर्भर इन पंचायतों में हजारों परिवारों के सामने अपने पशुओं को सुरक्षित रखने और उनके लिए चारे की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है.
दियारा क्षेत्र में बाढ़ से चारे के सभी स्रोत प्रभावित
बाढ़ के पानी ने दियारा क्षेत्र को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है. इससे हरे चारे के लगभग सभी स्रोत समाप्त हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट है, वहीं दूसरी ओर मवेशी भी भूख की स्थिति में पहुंच रहे हैं. पशुपालक अपने पशुओं के साथ सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, लेकिन वहां भी चारे की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी बढ़ती जा रही है.
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बांध की मरम्मत के बाद भी रिसाव का आरोप
गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व ओएनएस चिमनी के पीछे बांध टूटने की घटना के बाद जल संसाधन विभाग की ओर से बांध की मरम्मत कराई गई थी. हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि मरम्मत के बाद भी बांध से पानी का रिसाव जारी है. इसी वजह से रानी-1, रानी-2 और सबसे अधिक रानी-3 पंचायत के वे इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जो सामान्य तौर पर बाढ़ प्रभावित नहीं होते थे.
अधिकांश सड़कों पर दो से ढाई फीट तक पानी
दादूपुर के पूर्व मुखिया राजेश शर्मा ने बताया कि पंचायत की अधिकांश सड़कों पर दो से ढाई फीट तक पानी चढ़ चुका है. इससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. वहीं, चमथा-3 के मुखिया प्रतिनिधि शिबू राव ने कहा कि गंगा का बढ़ता जलस्तर लगातार नई सड़कों और बस्तियों को अपनी चपेट में ले रहा है.
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बिशनपुर में भोजन और पशु चारे का संकट
सबसे गंभीर स्थिति बिशनपुर पंचायत की बताई जा रही है. मुखिया उदय कुमार राय ने कहा कि बिशनपुर हर वर्ष बाढ़ का सबसे अधिक दंश झेलता है और इस बार भी पंचायत के अधिकांश हिस्से जलमग्न होने की कगार पर हैं. लोगों के सामने भोजन, आवास और पशुओं के चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है.
राहत शिविर और चारा शिविर शुरू करने की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और पशुओं के लिए विशेष चारा शिविर शुरू करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं पहुंची तो बाढ़ का संकट मानव जीवन के साथ-साथ पशुधन के लिए भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.
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