Begusarai News : वरिष्ठ वामपंथी चिंतक डॉ. भगवान प्रसाद सिन्हा की पुस्तक 'चौखंडी (लाल मटिहानी भुसारी का पेइचिंग)' का लोकार्पण रविवार को शहर के केडीएम होटल के सभागार में आयोजित समारोह में किया गया. कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने पुस्तक को क्षेत्रीय इतिहास, जनसंघर्षों और सामाजिक स्मृतियों का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया.
इतिहास को जीवंत बनाता है वर्तमान का चिंतन : प्रो. मटुकनाथ चौधरी
समारोह के मुख्य वक्ता प्रो. मटुकनाथ चौधरी ने कहा कि इतिहास तब तक केवल कब्रगाह के समान है, जब तक उसमें चिंतन की प्राण-प्रतिष्ठा न हो. उन्होंने कहा कि वर्तमान ही सार्वभौम है और वर्तमान के चिंतन से ही इतिहास जीवंत बनता है. अन्यथा वह केवल बीते समय का निष्प्राण दस्तावेज बनकर रह जाता है. उन्होंने कहा कि भविष्य केवल कल्पना है और उसे साकार करने की जिम्मेदारी वर्तमान पर ही होती है. प्रो. चौधरी ने कहा कि 'चौखंडी' में लेखक ने इतिहास के स्थूल तथ्यों को साहित्य की संवेदनशीलता से जोड़कर उसे नई जीवंतता प्रदान की है.
पुस्तक को जनसंघर्षों के दस्तावेज के रूप में किया समर्पित
पुस्तक के लेखक डॉ. भगवान प्रसाद सिन्हा ने कहा कि 'चौखंडी' भुसारी अंचल के जनसंघर्षों का जीवंत दस्तावेज है. उन्होंने इस पुस्तक को अपने गांव के प्रतिभाशाली ग्रामीण नौबत ठाकुर, स्वतंत्रता सेनानी नारायण राय तथा जनआंदोलन के अग्रणी नेता कॉमरेड उपेंद्र खां की स्मृति को समर्पित किया. उन्होंने बताया कि नौबत ठाकुर वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने वाले ऐतिहासिक जुलूस में शामिल रहे थे.
पुस्तक की समीक्षा में साहित्य और इतिहास के समन्वय पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान सभा के वरिष्ठ नेता विद्यानंद यादव ने की, जबकि संचालन मोना चौधरी ने किया. प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसके पात्रों की तुलना रामवृक्ष बेनीपुरी की प्रसिद्ध कृति 'माटी की मूरतें' से की. नूतन आनंद ने 'चौखंडी' की क्रांतिकारी विरासत को बेगूसराय की लेनिनग्रादीय परंपरा से जोड़ते हुए इसकी ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला.
स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर दिया गया जोर
डॉ. अनिल राय ने कहा कि यह पुस्तक स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. प्रो. नीलू अग्रवाल ने कहा कि 'चौखंडी' केवल इतिहास ग्रंथ नहीं, बल्कि स्मृतियों और समाज के संबंधों को समझने का गंभीर प्रयास है. रौशन प्रकाश ने इसे वर्तमान समय में इतिहास की प्रासंगिकता पर पुनर्विचार का आधार बताया, जबकि अनीश अंकुर ने पुस्तक में अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और कम्युनिस्ट आंदोलन की वैचारिक व्यापकता की चर्चा की.
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ समारोह का समापन
समारोह में पूर्व विधायक राजकुमार सिंह, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुदामा प्रसाद सिंह तथा कुमार सर्वेश ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम की शुरुआत रमा मौसम की सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई, जबकि समापन रंजन कुमार झा के गीत से हुआ. स्मित पराग ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
स्वतंत्रता सेनानियों और जननायकों के परिजनों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान नौबत ठाकुर, राजेंद्र राय तथा कॉमरेड खुशीलाल वर्मा के परिजनों को पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया. समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
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