Begusarai Passing Out Parade : (विकाश मिश्रा) बिहार पुलिस में शामिल होने का सपना पूरा होने की खुशी हर जवान के चेहरे पर साफ झलक रही थी. कंधों पर वर्दी का गौरव था, लेकिन वर्षों तक साथ रहे दोस्तों से बिछड़ने का दर्द भी कम नहीं था. बेगूसराय पुलिस लाइन में मंगलवार को आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम कर दीं. प्रशिक्षु जवान लड्डू सिंह और हर्षवर्धन अपनी दोस्ती और प्रशिक्षण के दिनों को याद करते-करते भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े.
प्रशिक्षण के पहले दिन से शुरू हुई दोस्ती
दोनों जवानों ने बताया कि जब वे पहली बार प्रशिक्षण के लिए बेगूसराय पुलिस लाइन पहुंचे थे, तब सब कुछ नया और चुनौतीपूर्ण लग रहा था. घर-परिवार से दूर रहना आसान नहीं था और कठिन प्रशिक्षण के बीच खुद को नए माहौल में ढालना भी बड़ी चुनौती थी. ऐसे समय में साथी जवानों का साथ मिला और धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती चली गई.
Begusarai News : पुलिस लाइन बन गई थी दूसरा घर
लड्डू सिंह और हर्षवर्धन ने बताया कि शुरुआती दिनों में घर की याद बहुत सताती थी. हालांकि, साथियों के सहयोग, अपनत्व और भाईचारे ने हर मुश्किल को आसान बना दिया. सुबह की परेड से लेकर देर रात तक की तैयारियों, मैदान में बहाए गए पसीने, हंसी-मजाक और संघर्ष के अनगिनत पलों ने उनके रिश्ते को और मजबूत बनाया. समय के साथ प्रशिक्षण केंद्र ही उनका दूसरा घर बन गया.
Bihar News : विदाई की घड़ी ने कर दिया भावुक
पासिंग आउट परेड के दिन जब सभी प्रशिक्षु सिपाही अलग-अलग जिलों में अपनी नई जिम्मेदारियों के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहे थे, तब बिछड़ने का एहसास दोनों जवानों को भावुक कर गया. उन्होंने कहा कि आज वर्दी पहनने का सपना तो पूरा हो गया, लेकिन उन दोस्तों से दूर होने का दर्द भी कम नहीं है, जिनके साथ जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिन गुजारे हैं.
दोस्ती की कहानी सुनाते-सुनाते भर आई आंखें
मीडिया से बातचीत के दौरान दोनों जवान कई बार भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान बनी दोस्ती केवल बैच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जीवनभर कायम रहेगी. चाहे पोस्टिंग किसी भी जिले में हो, दिलों का यह रिश्ता हमेशा बना रहेगा. दोस्ती की यादों को साझा करते हुए दोनों की आंखों से आंसू छलक पड़े.
241 प्रशिक्षु सिपाही बने बिहार पुलिस का हिस्सा
बेगूसराय पुलिस लाइन में आयोजित पासिंग आउट परेड में कुल 241 प्रशिक्षु सिपाही बिहार Police का हिस्सा बने. समारोह के दौरान एक ओर जहां परिवारों के चेहरे अपने बेटों की सफलता पर गर्व से चमक रहे थे, वहीं दूसरी ओर कई जवान अपने साथियों से बिछड़ने की कसक महसूस कर रहे थे.
सिर्फ परेड नहीं, यादों का उत्सव भी था यह दिन
यह पासिंग आउट परेड केवल प्रशिक्षण की समाप्ति का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि संघर्ष, समर्पण, भाईचारे और दोस्ती की उन अनमोल यादों का उत्सव भी था, जो इन जवानों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी. वर्दी के साथ नई जिम्मेदारियों की शुरुआत हुई, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान बने रिश्ते और यादें उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन गईं.
