Begusarai News : बीहट स्थित सिद्धपीठ बड़की दुर्गा मंदिर परिसर में इन दिनों श्रद्धा व भक्ति का सागर उमड़ रहा है.विगत 26 जून से अयोध्या से आये कथा व्यास श्री श्री 1008 विद्यावाचस्पति पंडित प्रवर वैष्णवाचार्य ब्रह्मर्षि श्री रामकिंकराचार्य द्वारा आदिकवि महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण की दुर्लभ कथा की जा रही है. सातवें दिन राम और रावण के बीच युद्ध कांड की कथा प्रसंग में उन्होंने कहा कि विभीषण अपने भाई लंकेश रावण को त्याग कर मर्यादा पुरूषोत्तम राम के शरण में आये.
सुग्रीव-जामवंत की शंका के बावजूद श्रीराम ने अपनाया विभीषण को
वानर राज सुग्रीव और जामवंत के शंका जाहिर करने के बाद भी शरण में आये याचक को संरक्षण देने में क्षण भर भी देर नहीं किया और विभीषण का समुद्र के जल से राजतिलक कर दिया. उन्होंने कहा सरेंडर हो गये शरणार्थी को शरण देकर उसका संरक्षण करना ही धर्म की मर्यादा है इसलिए भगवान राम को शरणागत वत्सल भी कहते हैं. उन्होंने कहा कथा केवल श्रवण मात्र नहीं है. इस पर चिंतन करते हुए इसे आत्मसात करने की जरूरत है. जीवन का मूल ध्येय सेवा है.
सेवा ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म, रामायण कथा में दिया संदेश
जो मानव अपने परिवार और समाज की सेवा करता है,वही संत और साधु है. उन्होंने कहा इस दुनिया में श्रीराम से बड़ा कोई मर्यादापुरूषोत्तम नहीं हुआ इसलिए आज भी प्रभु श्रीराम दुनिया के आदर्श हैं. विदित हो कि यह ज्ञान यज्ञ आयोजन बड़की दुर्गा मंदिर की महिला साप्ताहिक संगोष्ठी मंडली द्वारा किया गया है. यजमान मंटुन देवी और मिथिलेश देवी ने बताया कि 4 जुलाई को कथा का समारोहपूर्वक समापन होगा.
