प्रभात पड़ताल - डहुआ गांव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशुओं की हो रही अवैध तस्करी

प्रभात पड़ताल - डहुआ गांव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशुओं की हो रही अवैध तस्करी

संजीव पाठक, बौंसी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध कारोबार चला रहे धंधे बाजों के लिए बौंसी थाना क्षेत्र का डहुआ गांव इन दिनों पशु तस्करों का सेफ जोन बन गया है. गुरुवार को जब प्रभात खबर के द्वारा मामले की पड़ताल की गयी तो डहुआ गांव के विद्यालय के समीप बड़े से ट्रक पर भैंसों को चढ़ाने की तैयारी की जा रही थी. जबकि सामने की ओर करीब दो दर्जन से ज्यादा भैंस बंधी हुई थी. एक और ट्रक वहां पहले से खड़ा था. मौके पर मौजूद गांव के ही मोहम्मद सलीम का पुत्र रहीम के द्वारा संवाददाता को वीडियो बनाने की मनाही की जा रही थी और मामला को रफा दफा करने के लिए प्रलोभन भी दिए जा रहे थे. इस दौरान पुत्र के कहने पर पिता भी वहां पहुंच गये और मामले को वहीं सलटाने की खुशामद करने लगे. पड़ताल में जब दोनों से बात की गयी कि आखिरकार किसके आदेश पर और किस तरह यह कार्य किया जा रहा है तो दोनों ने मामले में चुप्पी साध ली. मालूम हो कि प्रत्येक शुक्रवार को इस गांव से करीब तीन से ज्यादा ट्रैकों पर भैंसे और गायों को चढ़ाकर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश भेजने का काम किया जाता है. इस कारोबार में संगठित गिरोह व इससे जुड़ा नेटवर्क इस कदर प्रभावी है कि नेशनल हाईवे से पशु तस्कर आसानी से इसे बिहार से झारखंड लेकर प्रवेश कर जाते हैं. जगह-जगह मौजूद पुलिस की गस्ती गाड़ियों का भी इन्हें कोई खौफ नहीं रहता.

गोवंश के संरक्षण व संवर्धन पर है जोर

मालूम हो कि केंद्र और राज्य सरकार जहां गोवंश के संरक्षण व संवर्धन पर जोर दे रही है. वहीं पशु तस्कर सरकार के इस मंसा पर पानी फेरने पर आमदा है. हाल यह है कि मुख्य मार्ग से प्रतिमाह हजारों की संख्या में पशु तस्कर पशुओं को लेकर बांग्लादेश भेज रहे हैं. बिहार और संथाल परगना के रास्ते ही पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश इन्हें पहुंचाया जाता है. बताया जाता है कि बांग्लादेशी पशु तस्कर तो सक्रिय है ही कुछ स्थानीय कारोबारी भी इस रैकेट के सदस्य हैं.

पशु क्रूरता अधिनियम की उड़ रही धज्जियां

पशु तस्कर जिस तरह से पशुओं को वाहनों पर चढ़ाकर इन्हें दूसरे राज्य में ले जाकर बेच रहे हैं. वह पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत भी आता है. एडवोकेट रविंद्र शर्मा की माने तो इस अधिनियम के तहत जानवरों को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट पहुंचाने से रोकने का प्रावधान है. साथ ही वाहनों में क्षमता से ज्यादा जानवर भरकर ले जाना भी इस अधिनियम के अंतर्गत आता है. मालूम हो कि जिस तरह से ट्रकों पर इन्हें चढ़ा कर ले जाया जाता है वह पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत आता है. ऐसे में पशु तस्करी का यह मामला पशु क्रूरता अधिनियम के तहत साफ-साफ दिख रहा है. बताया जाता है कि इस अधिनियम के तहत जुर्माना के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है.

कहते हैं एसडीएम

इस मामले में एसडीएम अविनाश कुमार ने बताया कि मामले में बौंसी थानाध्यक्ष को जांच का निर्देश दिया गया है. जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

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