बौंसी. धोरैया के गौरा गांव में पधारे हरियाणा के महान संत गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज द्वारा सोमवार को ऐतिहासिक मंदार पर्वत का भ्रमण किया गया. मालूम हो कि स्वामी जी एक शिक्षाविद, दार्शनिक, मार्गदर्शक, लेखक और योगी हैं. नैतिकता, मूल्य और गीता पर उनकी किताबें और व्याख्यान कई लोगों के लिए एक अध्याय बन गये हैं. साधु संतों और दर्जनों श्रद्धालुओं के साथ वह मंदार तराई स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में पहुंचकर दर्शन पूजन किया और यहां के बाद रोपवे से मंदार पर्वत शिखर तक पहुंचे. पर्वत शिखर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद पैदल ही वहां से पर्वत मध्य स्थित योनि कुंड, शंख कुंड, चक्रावत कुंड सहित अन्य जगहों का भी दर्शन किया. इस मौके पर उनके साथ मौजूद श्रद्धालुओं के द्वारा जानकारियां भी उपलब्ध करायी गयी. मंदार पर्वत पर पहुंचने के बाद स्वामी ज्ञानानंद ने बताया कि जिस पर्वत से समुद्र मंथन हुआ और संसार को 14 रत्न की प्राप्ति हुई है. जिसके गर्भ से अमृत का घड़ा मिला और उसकी बंदे जहां जहां गिरी वहां महाकुंभ लग रहा है. ऐसे मंदार पर्वत के भ्रमण मात्र से ही जन्म जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं. उन्होंने कहा कि समय के बदलाव के साथ हमारे ऐतिहासिक और धार्मिक जितने भी स्थल हैं वह कहीं ना कहीं स्वयं को प्रकट कर रहे हैं और बता रहे हैं कि सनातन धर्म कितना विशाल और समृद्ध है. कहा कि पर्वत शिखर पर भगवान शिव का प्रकाट्य रूप के साथ-साथ इतनी दिव्यताएं मंदार स्वयं अपने में लिए हुए हैं. ऐसे समय में यहां आना तब हुआ जब प्रयागराज में कुंभ स्नान के लिए पूरा विश्व पहुंचा था. उन्होंने कहा कि बिहार के साथ-साथ भारत सरकार इस पौराणिक गरिमा को और अच्छे संकल्पित भाव से विश्व के समक्ष लाये ताकि भारत का यह गौरव मंदार सनातन धर्म का स्वाभिमान पूरे विश्व के सामने एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत हो सके. साधु संतों और श्रद्धालुओं के साथ उन्होंने मंदारेश्वर काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ-साथ भगवान नरसिंह गुफा में भी पूजा अर्चना की. इस मौके पर उनके साथ भागवत कथा वाचक श्री संजीव कृष्ण ठाकुर, शक्ति सिंह जी, जिला परिषद सदस्य मनोज बाबा, पर्यटन विभाग के प्रबंधक मुकेश कुमार, राहुल डोकानिया, ललन सिंह, पीयूष भदोरिया सहित अन्य मौजूद थे.
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