मंदार में 1.70 करोड़ों का कैफेटेरिया बंद, सावन में हजारों श्रद्धालुओं को नहीं मिल रही भोजन और विश्राम की सुविधा

मंदार के करोड़ों की लागत से बना कैफेटेरिया पिछले पांच महीनों से बदहाल है. सावन के दौरान हजारों श्रद्धालुओं और कांवरियों को भोजन और विश्राम की सुविधा नहीं मिल पा रही है. स्थानीय लोग और पर्यटक सरकारी संपत्ति के इस उपेक्षापूर्ण रवैये पर सवाल उठा रहे हैं.

Banka News: बांका जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल मंदार में करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया कैफेटेरिया इन दिनों बदहाली का प्रतीक बन गया है. करीब 1.70 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह कैफेटेरिया पिछले पांच महीनों से बंद पड़ा है. नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण परिसर में गंदगी फैल गई है, दीवारों और आसपास लताएं उग आई हैं और भवन धीरे-धीरे जर्जर होता दिखाई दे रहा है. सावन के दौरान जब हजारों कांवरिए और श्रद्धालु मंदार पहुंच रहे हैं, तब इस महत्वपूर्ण सुविधा का बंद रहना पर्यटन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई यह संपत्ति अब उपेक्षा का शिकार बन चुकी है. यदि समय रहते इसकी मरम्मत, सफाई और संचालन की व्यवस्था नहीं की गई, तो करोड़ों रुपये का यह ढांचा धीरे-धीरे खंडहर में बदल सकता है.

पर्यटन सुविधा के लिए बना था कैफेटेरिया

मंदार की तराई में स्थित इस कैफेटेरिया का निर्माण पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भोजन, विश्राम और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया था.

इस परियोजना की शुरुआत तत्कालीन पर्यटन मंत्री डॉ जावेद इकबाल अंसारी के प्रयासों से हुई थी. 10 जनवरी 2015 को इसका शिलान्यास किया गया और निर्माण एजेंसी श्रीराम इंटरप्राइजेज ने 2 सितंबर 2015 को भवन निर्माण कार्य पूरा कर पर्यटन विभाग को सौंप दिया.

निर्माण पूरा होने के बाद भी लंबे समय तक नहीं हुआ संचालन

स्थानीय लोगों के अनुसार, भवन तैयार होने के बाद भी इसका संचालन लंबे समय तक शुरू नहीं हो सका.

बाद में पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के प्रयासों से कैफेटेरिया चालू हुआ, लेकिन अब एक बार फिर यह पूरी तरह बंद हो गया है. पिछले लगभग पांच महीनों से यहां कोई नियमित गतिविधि नहीं हो रही है.

सावन में बढ़ी परेशानी

इन दिनों सावन के अवसर पर मंदार में कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग बाबा मंदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

ऐसे समय में कैफेटेरिया का बंद रहना श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बड़ी असुविधा बन गया है. वर्तमान में केवल व्याख्यान भवन में संचालित रेस्टोरेंट ही उपलब्ध है, जहां भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है.

गंदगी और रखरखाव की कमी बनी चिंता

कैफेटेरिया परिसर में गंदगी जमा हो गई है और भवन की दीवारों तथा आसपास के हिस्सों में लताएं फैलने लगी हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर सफाई और रखरखाव नहीं किया गया, तो भवन की संरचना को भी नुकसान पहुंच सकता है. उनका मानना है कि इतनी बड़ी सार्वजनिक संपत्ति का अनुपयोगी बने रहना सरकारी संसाधनों की बर्बादी है.

स्थानीय लोगों ने उठाई संचालन शुरू करने की मांग

ग्रामीणों और व्यापारियों ने पर्यटन विभाग से मांग की है कि कैफेटेरिया का संचालन जल्द से जल्द दोबारा शुरू कराया जाए.

उनका कहना है कि इससे न केवल पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

Banka News: पर्यटन विभाग ने दी पहल का संकेत

मंदार क्षेत्र में पर्यटन विभाग के प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि कैफेटेरिया पूर्व में जिला प्रशासन को हैंडओवर किया गया था.

उन्होंने कहा कि अब पर्यटन विभाग इसे दोबारा अपने अधीन लेकर व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की दिशा में पहल करेगा, ताकि मंदार आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें.

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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार पाठक प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बौंसी (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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