बौंसी में कल निकलेगी भगवान मधुसूदन की भव्य रथयात्रा, झारखंड से भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद

Mandar Rath Yatra 2026 : बौंसी के भगवान मधुसूदन मंदिर में कल ऐतिहासिक रथयात्रा का आयोजन होगा. हजारों श्रद्धालु बिहार-झारखंड से पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लेंगे. गुरुवार को रथयात्रा पड़ना विशेष शुभ संयोग माना जा रहा है.

Mandar Rath Yatra 2026 : बांका जिले के बौंसी स्थित प्रसिद्ध भगवान मधुसूदन मंदिर में गुरुवार को ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव का आयोजन होगा. वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और जयघोष के बीच भगवान मधुसूदन को भव्य रथ पर विराजमान कराया जाएगा. पंडा समाज और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ रथ को खींचते हुए नगर भ्रमण कराएंगे.

दोपहर दो बजे शुरू होगी रथयात्रा

मंदिर प्रशासन के अनुसार दोपहर करीब 2 बजे भगवान मधुसूदन की रथयात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होगी. यात्रा जैन मंदिर मोड़ तक जाएगी और वहां से वापस मंदिर परिसर के बाहर तक लौटेगी. श्रद्धालु पूरे मार्ग में जयघोष और भजन-कीर्तन के साथ भगवान के दर्शन करेंगे.

रेलवे विद्युतीकरण के बाद बदला गया रूट

पहले यह रथयात्रा बौंसी मेला रोड, गांधी चौक, मुख्य चौक होते हुए भगवान महावीर मंदिर तक जाती थी. वहां कुछ समय के लिए रथ रोकने की वर्षों पुरानी परंपरा थी. लेकिन रेलवे विद्युतीकरण के बाद मार्ग में ऊंची बिजली लाइनों के कारण रथ को मुख्य चौक तक ले जाना संभव नहीं रहा. इसी कारण कुछ वर्ष पहले यात्रा मार्ग में परिवर्तन किया गया.

गुरुवार को रथयात्रा पड़ना माना जा रहा शुभ संयोग

मंदिर के पुजारी पंडित अवधेश ठाकुर के अनुसार इस वर्ष रथयात्रा का गुरुवार को पड़ना अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान मधुसूदन के दर्शन और रथयात्रा में भाग लेने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

सदियों पुरानी है रथयात्रा की परंपरा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने 'मधु' नामक असुर का वध किया था, जिसके बाद वे मधुसूदन नाम से विख्यात हुए. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं तीन दिनों तक भगवान मधुसूदन की विशेष पूजा की थी, जिसके बाद इस परंपरा की शुरुआत हुई.

इतिहासकार उदयेश रवि के अनुसार, मुगल आक्रमणों के समय भगवान मधुसूदन की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए मंदार पर्वत से बौंसी लाया गया था. बाद में तत्कालीन राजाओं और जमींदारों ने रथयात्रा की परंपरा को नियमित स्वरूप दिया.

साल में दो बार निकलती है भगवान मधुसूदन की रथयात्रा

भगवान मधुसूदन देश के उन विरले देवस्थानों में शामिल हैं, जहां वर्ष में दो बार रथयात्रा निकाली जाती है. पहली यात्रा मकर संक्रांति के अवसर पर गरुड़ रथ से मंदार पर्वत तक होती है, जबकि दूसरी यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तर्ज पर नगर भ्रमण के रूप में आयोजित की जाती है.

पंचामृत स्नान के बाद 16 पहियों वाले रथ पर विराजेंगे भगवान

रथयात्रा से पहले भगवान मधुसूदन का पंचामृत स्नान, विशेष श्रृंगार और शुद्ध अनाज से बने भोग का अर्पण किया जाएगा. इसके बाद भगवान को गर्भगृह से बाहर लाकर 16 पहियों वाले विशाल लकड़ी के रथ पर विराजमान कराया जाएगा. श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ रथ को खींचेंगे. मान्यता है कि रथ को स्पर्श करने या खींचने मात्र से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

उत्सवमय हुआ बौंसी, हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

रथयात्रा को लेकर पूरे बौंसी और मंदार क्षेत्र में उत्सव का माहौल है. बाजारों में रौनक बढ़ गई है और ढोल-नगाड़ों, झाल तथा भजन-कीर्तन की धुन से वातावरण भक्तिमय हो गया है. बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होकर भगवान मधुसूदन का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे.

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लेखक के बारे में

संजीव कुमार पाठक प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बौंसी (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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