Aurangabad News : दाउदनगर महाविद्यालय, दाउदनगर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की ओर से अंकोढ़ा पंचायत के सिपहा गांव में चल रहे सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. देव प्रकाश के निर्देशन में स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैली के माध्यम से ग्रामीणों को सामाजिक कुरीतियों एवं नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया.
योगाभ्यास और लक्ष्यगीत से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत योगाभ्यास और लक्ष्यगीत के सामूहिक वाचन से हुई. इसके बाद स्वयंसेवकों ने दहेज प्रथा, नशामुक्ति और सर्पदंश से बचाव से संबंधित नारों की तख्तियां लेकर गांव में जागरूकता रैली निकाली. रैली के बाद गांव के अलग-अलग चौराहों पर लगातार तीन नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति दी गई. करीब तीन दर्जन स्वयंसेवकों ने विभिन्न भूमिकाओं में अभिनय कर ग्रामीणों को महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिए.
दहेज प्रथा के खिलाफ दिया संदेश
दहेज प्रथा पर आधारित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को दहेज लेने और देने, दोनों का विरोध करने का संदेश दिया गया. स्वयंसेवकों ने अभिनय के जरिए दहेज प्रथा से समाज और परिवारों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी प्रस्तुत किया.
सर्पदंश पर अंधविश्वास से बचने की अपील
सर्पदंश पर आधारित नाटक में ग्रामीणों को अंधविश्वास और ओझा-गुनी के चक्कर में नहीं पड़ने के लिए जागरूक किया गया. स्वयंसेवकों ने संदेश दिया कि सांप काटने की स्थिति में पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर उचित चिकित्सा करानी चाहिए.
नशामुक्ति और सड़क सुरक्षा पर भी किया जागरूक
नशामुक्ति पर प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रहने, नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने और सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने का संदेश दिया गया. कार्यक्रम के दूसरे सत्र में नशामुक्ति विषय पर बौद्धिक परिचर्चा भी आयोजित की गई.
सूखे नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई चिंता
मुख्य वक्ता महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. श्रीनिवास सिंह ने सूखे नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह समाज और स्वास्थ्य, दोनों के लिए गंभीर समस्या है. नशे का शरीर और मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इससे व्यक्ति का जीवन बर्बाद हो सकता है.
अगले दिन के कार्यक्रमों की बनी रूपरेखा
परिचर्चा के बाद दिनभर आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई और अगले दिन की गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई. कार्यक्रम का संचालन दर्शनशास्त्र की सहायक प्राध्यापिका डॉ. रोजी कांत ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान की सहायक प्राध्यापिका डॉ. शहला बानो ने किया. इस अवसर पर हिंदी के सहायक प्राध्यापक मंजू कुमार सोरेन सहित सिपहा गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
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