Aurangabad News : मंडल कारा औरंगाबाद में इस बार रक्षाबंधन का पर्व भावनाओं और अपनत्व से सराबोर रहा. जेल की चारदीवारी के बीच जब 350 से अधिक बंदियों की बहनें उनसे मिलने पहुंचीं, तो माहौल भावुक हो उठा. बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, माथे पर तिलक लगाया, मिठाई खिलायी और आरती उतारकर उनके सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की. लंबे समय बाद भाई-बहनों की मुलाकात ने बंदियों के चेहरों पर भी खुशी ला दी.
बहनों ने राखी बांधकर दिया भाईचारे और सकारात्मक जीवन का संदेश
इसी क्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, औरंगाबाद की ओर से बीके सविता देवी और बीके सुमन बहन मंडल कारा पहुंचीं. उन्होंने बंदियों को राखी बांधी और तिलक लगाकर आरती उतारी. इसके बाद टोली प्रसाद खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने बंदियों को भाईचारे, आत्मिक शांति, सद्भावना और सकारात्मक जीवन का संदेश दिया. कार्यक्रम में भाई दिनेश कुमार, सुनील कुमार एवं महेश कुमार भी मौजूद रहे.
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रिश्तों से जुड़ने और अपनत्व का पर्व है रक्षाबंधन
जेल अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा, अपनत्व और मानवीय संवेदना का प्रतीक है. जेल में इस तरह के आयोजन बंदियों को उनके परिवार और समाज से भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं. इससे उनके भीतर सकारात्मक सोच विकसित होती है और सुधार की भावना को बल मिलता है.
जेल कर्मियों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक अधीक्षक संजीव कुमार, उच्च कक्षपाल मनोज दुबे, कक्षपाल मो. सोनू आलम, रोशन कुमार समेत अन्य कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन के दौरान बंदियों और उनके परिजनों की मुलाकात को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं की गयी थीं.
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