औरंगाबाद: जामुड़िया में ठेका श्रमिक की मौत के बाद हंगामा, 16.50 लाख मुआवजे पर बनी सहमति; बेटे को नौकरी का आश्वासन

जामुड़िया के श्याम सेल कारखाने में ठेका श्रमिक की मौत के बाद प्रबंधन ने 16.50 लाख रुपये मुआवजा और मृतक के बेटे को नौकरी देने का आश्वासन दिया है।

Aurangabad News : जामुड़िया के इकड़ा स्थित श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड कारखाने में काम के दौरान घायल हुए ठेका श्रमिक मानिक रुईदास की इलाज के दौरान मौत हो गयी. श्रमिक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों, बाउरी समाज के प्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं ने कारखाना गेट के बाहर मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसको लेकर काफी देर तक कारखाना परिसर के बाहर गतिरोध की स्थिति बनी रही.

मुआवजे को लेकर प्रबंधन और परिजनों में लंबी बैठक

मृत श्रमिक के परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर कारखाना प्रबंधन के साथ लंबी बैठक हुई. काफी विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी. इसके बाद परिवार को आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद विरोध समाप्त कर दिया गया.

15 लाख मुआवजा, अंतिम संस्कार और जीवन-यापन के लिए भी राशि

बैठक में तय हुआ कि मृत श्रमिक मानिक रुईदास के परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जायेगा. इसके अलावा अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 50 हजार रुपये और परिवार के तत्काल जीवन-यापन के लिए एक लाख रुपये दिये जायेंगे. इस तरह परिवार को कुल 16.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनी.

18 साल की उम्र के बाद बेटे को नौकरी का आश्वासन

समझौते के तहत मृत श्रमिक के बेटे मनोज रुईदास को 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सप्लाई कॉन्ट्रैक्टर के अधीन नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है. आर्थिक सहायता के साथ रोजगार के इस आश्वासन के बाद परिवार ने फिलहाल अपना आंदोलन समाप्त कर दिया.

बाउरी समाज के प्रदेश अध्यक्ष ने उठायी न्याय की मांग

बैठक में बाउरी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुमंत बाउरी भी मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि कारखाने में एक श्रमिक की मौत बेहद दुखद है. गरीब परिवार को न्याय और उचित सहायता दिलाने के उद्देश्य से समाज के प्रतिनिधि यहां पहुंचे थे. प्रबंधन से बातचीत के बाद परिवार के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है. उन्होंने कहा कि बाउरी समाज हमेशा मेहनतकश और गरीब लोगों के साथ खड़ा रहा है और आगे भी उनके साथ रहेगा.

ठेका श्रमिकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में ठेका श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिये हैं. मुआवजे और रोजगार के आश्वासन से मृत श्रमिक के परिवार को तत्काल राहत मिली है, लेकिन काम के दौरान श्रमिक की मौत के बाद कारखानों में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल बरकरार हैं.

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By Jitendra trivedi

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