दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद करने वाले राहवीरों को मिलेगी 25 हजार प्रोत्साहन राशि

गुड सेमेरिटन के अधिकारों के संरक्षण व सुरक्षा के लिए उठाये गये कदम, न्यायिक पदाधिकारी, पुलिस अधिकारी व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

गुड सेमेरिटन के अधिकारों के संरक्षण व सुरक्षा के लिए उठाये गये कदम

न्यायिक पदाधिकारी, पुलिस अधिकारी व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

औरंगाबाद शहर. सड़क दुर्घटना के घायलों या पीड़िता की मदद करने वाले गुड सेमेरिटन (राहवीर) के अधिकारियों के संरक्षण की दिशा में ठोस पहल की गयी है. गुड सेमेरिटन की सुरक्षा व इनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया गया है. शुक्रवार को जिला परिवहन विभाग द्वारा गुड सेमेरिटन के अधिकारों के संरक्षण से संबंधित प्रावधानों पर आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. इसमें सभी न्यायिक पदाधिकारी, सभी पुलिस पदाधिकारी तथा अस्पताल एवं स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारी व कर्मी शामिल हुए. जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी व अपर जिला परिवहन पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों से अवगत कराया गया. यह भी जानकारी दी गयी कि अब गुड सेमेरिटन (राह वीरों) को प्रोत्साहन राशि के रूप में 25 हजार दिया जायेगा. इसमें बढ़ोतरी की गयी है. यह पहले 10 हजार थी. इसका उद्देश्य लोगों को प्रोत्साहित करना है, ताकि समय पर दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों को मदद कर सकें. बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय का दिशा-निर्देश सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2016) मामले पर आधारित है. इसे तब तक कानून का बल प्राप्त है, जब तक संसद कोई नया कानून नहीं बनाती है. कहा कि कोई भी राहगीर जो सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की मदद करता है, उसे गुड सेमेरिटन कहा जाता है. पीड़ित को अस्पताल ले जाना, प्राथमिक चिकित्सा देना, पुलिस या आपातकालीन सेवाओं को सूचित करना गुड सेमेरिटन के कार्यों में शामिल है. यह सुरक्षा सभी नागरिकों पर लागू होती है, चाहे उनका पेशा कुछ भी हो. दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों की मदद करने पर कोई नागरिक या आपराधिक जिम्मेदारी नहीं होगी. उन्हें अपनी निजी जानकारी बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. अस्पताल या पुलिस स्टेशन में उन्हें परेशान या हिरासत में नहीं लिया जा सकता. वे स्वेच्छा से ही अपनी पहचान बता सकते हैं, यहां तक कि मेडिको लीगल केस में भी.

पहचान बताने के लिए पुलिस नहीं कर सकती मजबूर

प्रशिक्षण के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बताया गया कि पुलिस किसी भी गुड सेमेरिटन को अपनी पहचान बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. उनसे पूछताछ केवल एक बार और उनकी सुविधानुसार समय और स्थान पर की जायेगी. बार-बार अदालत का चक्कर लगवाने के बजाय, वीडियो कांफ्रेंसिंग या हलफनामा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इसी तरह स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल प्रशासन के लिए भी निर्देश किया गया है. बताया कि अस्पतालों को दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तत्काल उपचार देना अनिवार्य है. वे गुड सेमेरिटन को रोक नहीं सकते या उनसे किसी भी तरह के भुगतान की मांग नहीं कर सकते. अस्पताल के प्रवेश द्वार पर गुड सेमेरिटन को परेशान नहीं किया जायेगा जैसा एक चार्टर प्रदर्शित करना होगा.

सम्मन करने से बचेंगे न्यायिक अधिकारी

न्यायिक पदाधिकारियों को गुड सेमेरिटन को अनावश्यक रूप से सम्मन करने से बचना चाहिए. हलफनामा या कमीशन के माध्यम से साक्ष्य लेने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि इन दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य लोगों के मन से डर को दूर करना और उन्हें सड़क दुर्घटना की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि गोल्डेन आवर (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) में अधिक से अधिक जानें बचायी जा सके.

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