अस्पताल में ही अनिवार्य हो संस्थागत प्रसव

सिविल सर्जन की अध्यक्षता में मातृ व शिशु मृत्यु की हुई समीक्षा

सिविल सर्जन की अध्यक्षता में मातृ व शिशु मृत्यु की हुई समीक्षा

प्रतिनिधि, औरंगाबाद नगर.

सदर अस्पताल स्थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र के सभागार में सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में मातृ एवं शिशु मृत्यु की समीक्षा हुई. बैठक में सभी प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, प्रखंड मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक, नामित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी शामिल हुए. जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो अनवर आलम ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम के तहत मातृ एवं शिशु मृत्यु के केस की स्टडी की जाती है तथा आवश्यक करेक्टिव एवं प्रीवेंटिव एक्शन लिये जाते हैं. ओबरा प्रखंड के एक केस की स्टडी में स्पष्ट हुआ कि दो गर्भ के बीच तीन साल का अंतर नहीं रखा गया. गर्भधारण के तत्काल पश्चात प्रसव पूर्व जांच में विलंब हुआ तथा सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से जब तक पहचान व पंजीकरण किया जाता, तब तक गर्भधारण के तीन से चार महीने बीत चुके थे, जबकि गर्भवती के पेट में जुड़वा बच्चे थे. एक तो निर्धारित प्रसव पूर्व जांच नहीं हुई, दूसरा प्रसव की योजना भी निश्चित नहीं की जा सकी थी. गर्भकाल में उच्च जोखिम धारण करने वाली महिला परीक्षा स्थल पर परीक्षा के दौरान प्रसव पीड़ा महसूस करती है और सीधे सदर अस्पताल में एडमिट होती है. सामान्य प्रसव उपरांत रक्तस्राव शुरू हो जाता है और महिला को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जाता है. रेफरल सेंटर जाने के क्रम में रास्ते में ही महिला की मौत हो जाती है. इस केस स्टडी की सबसे मार्मिक बात यह रही कि एक साथ तीन बच्चे मातृ विहीन हो जाते हैं. इसीलिए, आवश्यक है कि दो गर्भधारण के बीच तीन साल का अंतर रखा जाये. गर्भधारण का पता जैसे ही चले संबंधी क्षेत्र की आशा या एएनएम, सरकारी अस्पताल या विशेषज्ञ महिला चिकित्सक से अनिवार्य रूप से प्रसव पूर्व जांच करायी जाये. प्रसव पूर्व योजना निर्धारित हो. अनिवार्य रूप से संस्थागत प्रसव अर्थात किसी अस्पताल में ही प्रसव कराया जाये. सरकारी अस्पतालों में प्रसव होने पर शहरी लाभार्थियों को एक हजार तथा ग्रामीण क्षेत्र की लाभार्थियों को 1400 रुपये प्रदान किये जाते हैं. जिले के मातृ-शिशु कल्याण पदाधिकारी डॉ रवि रंजन ने मातृ-शिशु मृत्यु के स्थानीय एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय तथ्यों से अवगत कराया. साथ ही सोशल ऑटोप्सी की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी दी.

यह कार्यक्रम हर माह होगा

डीपीसी नागेंद्र कुमार केसरी व आरबीएसके के जिला को-ऑर्डिनेटर नीलम रानी की ओर से प्रतिवेदन प्रस्तुत किये गये. जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी अविनाश कुमार ने पोर्टल की जानकारी दी. जिला सामुदायिक उत्प्रेरक आनंद प्रकाश ने आशा की सहभागिता एवं सहयोग पर विमर्श किया. जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रतिमाह किया जायेगा. इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए जिलाधिकारी के स्तर से निर्देशित है कि सभी मातृ व शिशु मृत्यु की समीक्षा की जाये. सभी आशा फैसिलिटेटर अपने एवं संबंधित आशा से मातृ व शिशु मृत्यु का प्रतिवेदन प्राप्त करेंगे. इस कार्यक्रम का अंतिम उद्देश्य मातृ व शिशु मृत्यु के कारणों को पहचानना और आवश्यक सुधार करने का प्रयास करना है.

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By Sujit kumar

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