औरंगाबाद : रफीगंज में 60-65 साल साथ रहे पति-पत्नी की एक साथ अंतिम विदाई, एक साथ उठी अर्थियां तो रो पड़ा पूरा गांव

औरंगाबाद के बौर गांव में बिजली करंट की चपेट में आने से बुजुर्ग पति-पत्नी की दर्दनाक मौत हो गई. एक साथ उठी दोनों की अर्थी देख पूरा गांव गम में डूब गया.

Aurangabad News : रविवार को रफीगंज प्रखंड के ग्राम पंचायत बौर में ऐसा मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. शनिवार की शाम बिजली करेंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले पति-पत्नी की अर्थी जब रविवार को एक साथ उनके घर से श्मशान घाट के लिए उठी, तो पूरा गांव गम में डूब गया.

एक-दूसरे का साथ निभाते हुए जिंदगी के 60-65 वर्ष गुजारने वाले गोपाल प्रसाद और उनकी पत्नी एरावंती देवी ने मौत में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा. बुढ़ापे में दोनों का एक साथ दुनिया से विदा होना उनके जीवनभर के प्रेम और साथ की ऐसी निशानी बन गया, जिसे देखकर ग्रामीणों की आंखों से आंसू छलक पड़े.

घास काटने के दौरान गिरे 11 हजार वोल्ट तार की चपेट में आए

जानकारी के अनुसार बौर गांव निवासी 65 वर्षीय गोपाल प्रसाद और उनकी 60 वर्षीय पत्नी एरावंती देवी शनिवार की शाम गांव के बधार में घास काटने गए थे. बताया जाता है कि जिस स्थान पर दोनों घास काट रहे थे, उसी जगह पहले से 11 हजार वोल्ट का बिजली तार टूटकर जमीन पर गिरा हुआ था. इस दौरान तार दिखाई नहीं देने के कारण दोनों उसकी चपेट में आ गए. थोड़ी हो देर में करेंट ने दोनों की जान ले ली. हादसा इतना दर्दनाक था कि घटनास्थल पर ही पति-पत्नी की मौत हो गई.

पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचते ही मचा कोहराम

इधर घटना की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया. परिजन और ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. एक साथ जीवन का सफर तय करने वाले पति-पत्नी की एक साथ मौत की खबर से पूरे गांव में मातम पसर गया.

परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो उठा. इसके बाद रफीगंज पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा. पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों शव गांव लाए गए.

एक साथ निकलीं दो अर्थियां, श्मशान घाट की ओर रवाना

रविवार को जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए दोनों की अर्थियां एक साथ घर से निकलीं, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं. कोई अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था, तो कोई इस दर्दनाक दृश्य को देखकर स्तब्ध खड़ा था. सबसे भावुक कर देने वाला क्षण तब आया, जब दोनों की अर्थियां एक साथ श्मशान घाट की ओर रवाना हुईं.

जिन दोनों ने जीवन के हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाया, वे अंतिम यात्रा में भी साथ-साथ थे. ग्रामीणों का कहना था कि गोपाल प्रसाद और एरावंती देवी का दांपत्य जीवन उनके लिए हमेशा मिसाल रहा. जिंदगी के अंतिम पड़ाव तक दोनों एक-दूसरे के साथ रहे और मौत ने भी दोनों को अलग नहीं किया.

श्मशान घाट दंपत्ति की अर्थी ले जाते लोग | Prabhat Khabar Network

हादसे से बौर गांव में शोक, कई घरों में नहीं जले चूल्हे

गांव के लोगों ने बताया कि इस हादसे ने पूरे गांव को भीतर तक झकझोर दिया है. रविवार को बौर गांव के सैकड़ों घरों में चूल्हे तक नहीं जले. हर तरफ सिर्फ गोपाल प्रसाद और एरावंती देवी की मौत की चर्चा थी. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस घटना से दुखी था.

ग्रामीणों का कहना था कि यह सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए अपूरणीय दुख है. एक साथ उठी दोनों की अर्थियों ने यह संदेश भी दिया कि सच्चा जीवनसाथी वही होता है, जो जिंदगी के हर मोड़ पर साथ खड़ा रहे.

गोपाल प्रसाद और एरावंती देवी ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया और बुढ़ापे में भी एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा. अंत में जब दोनों ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो उनका साथ प्रेम की ऐसी अमिट निशानी छोड़ गया, जिसे बौर गांव के लोग लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे.

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By मनीष राज सिंघम

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