काशी विश्वनाथ का दर्शन कर घर लौटने की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई. प्रखंड के टेरी ग्राम निवासी रंजीत कुमार (34 वर्ष) और अभिषेक कुमार (18 वर्ष) की सड़क हादसे में हुई मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया. रविवार की अहले सुबह जब दोनों युवकों का शव गांव पहुंचा तो देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंच गए. परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया.
भभुआ के पास ट्रक से टकराई थी कार
बताया जाता है कि टेरी ग्राम से रंजीत कुमार, अभिषेक कुमार, आदित्य कुमार, अक्षय कुमार और चालक कुंदन कुमार शुक्रवार को एक कार से वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए निकले थे. शनिवार की सुबह करीब सात बजे सभी ने भगवान विश्वनाथ का दर्शन किया. दर्शन के बाद सभी कार से वापस घर लौट रहे थे. इसी दौरान भभुआ के समीप उनकी कार एक हाईवे ट्रक से टकरा गई.
हादसा इतना भीषण था कि रंजीत कुमार की मौत घटनास्थल पर ही हो गई. वहीं गंभीर रूप से घायल अभिषेक कुमार ने सदर अस्पताल भभुआ में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. हादसे में आदित्य कुमार और चालक कुंदन कुमार गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज ट्रामा सेंटर भभुआ में चल रहा है. वहीं अक्षय कुमार की स्थिति में सुधार होने के बाद उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया. पूरी जानकारी पढ़ें -
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एक साथ दो घरों में छाया मातम
रविवार की अहले सुबह दोनों युवकों का शव टेरी ग्राम पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया. बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार दोनों के घर पहुंचने लगे. परिजनों की चीख-पुकार और विलाप से पूरा गांव गमगीन हो उठा. दोनों युवकों को अंतिम बार देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी.
रंजीत कुमार और अभिषेक कुमार की एक साथ हुई मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है. शुक्रवार को दोनों परिवारों के युवक भगवान विश्वनाथ के दर्शन के लिए खुशी-खुशी घर से निकले थे, लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि लौटते समय यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन जाएगी.
गांव में ही हुआ अंतिम संस्कार
रविवार को दोनों युवकों का अंतिम संस्कार उनके पैतृक टेरी ग्राम में ही किया गया. अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और परिचित शामिल हुए. एक ही गांव से एक साथ दो युवकों की अर्थी उठते देख हर किसी की आंखें नम हो गईं. दोनों की असमय मौत ने पूरे टेरी ग्राम को गहरे दुख में डुबो दिया है.
यह हादसा केवल रंजीत और अभिषेक के परिवारों का दर्द नहीं रहा, बल्कि पूरे गांव का साझा दुख बन गया है. गांव में हर तरफ शोक का माहौल है और ग्रामीण दोनों परिवारों को इस दुख की घड़ी में ढांढस बंधा रहे हैं.
