बिहार के इस जिले में 32 एकड़ में बनेगा एक्वा पार्क, सम्राट चौधरी 15 जून को करेंगे शिलान्यास

Bihar News: भोजपुर को जल्द ही मत्स्य उद्योग की बड़ी सौगात मिलने वाली है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 जून को उदवंतनगर के नवादावेन में 31.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास करेंगे. इस परियोजना से मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में एक्वा टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा.

Bihar News: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 जून को भोजपुर जिले के उदवंतनगर प्रखंड की नवादावेन पंचायत पहुंचेंगे. यहां वे बाणासुर मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में बनने वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास करेंगे. इसके बाद मुख्यमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं.

अधिकारियों को मिला जिम्मा

दौरे को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने कई अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है. कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को नियमित रूप से स्थल का निरीक्षण करने और तैयारियों की निगरानी करने का निर्देश दिया है.

32 एकड़ में बनेगा आधुनिक एक्वा पार्क

नवादावेन स्थित बाणासुर मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क बनाया जाएगा. करीब 31.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पार्क 32 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा. इस परियोजना का उद्देश्य बिहार में मत्स्य उत्पादन को नई ऊंचाई देना है.

बनेगी राष्ट्रीय स्तर की मछली प्रजनन इकाई

इस परियोजना के तहत एक आधुनिक कॉर्प हेचरी यानी मछली प्रजनन केंद्र भी बनाया जाएगा. यहां बेहतर गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज तैयार किए जाएंगे. अधिकारियों का कहना है कि इससे बिहार के मत्स्य पालकों को काफी लाभ मिलेगा और राज्य की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी.

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी खर्च

परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पूरा करेंगी. इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी. केंद्र सरकार करीब 18.72 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि राज्य सरकार लगभग 12.48 करोड़ रुपये का योगदान देगी.

मत्स्य पालन के साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क सिर्फ मत्स्य उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा. इससे एक्वा टूरिज्म यानी जल कृषि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. लोग यहां आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों को देख सकेंगे. इससे क्षेत्र में नई आर्थिक गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है.

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

परियोजना के शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को बेहतर सुविधाएं और तकनीकी सहायता मिलेगी. सरकार का मानना है कि यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.

बिहार को मिलेगी नई पहचान

अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद बिहार देश के प्रमुख मत्स्य बीज उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा. इससे राज्य में मत्स्य उद्योग का विस्तार होगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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By Abhinandan pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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