Bihar New Fourlane Project: आरा और उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बैरिया को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित महुली गंगा पुल परियोजना अब आगे बढ़ गई है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 1,564 करोड़ रुपये की लागत वाली 27.062 किलोमीटर लंबी आरा-बैरिया फोरलेन सड़क परियोजना के लिए 3 जुलाई को टेंडर जारी कर दिया है. टेंडर 20 अगस्त को खोले जाने की संभावना है. इस परियोजना का निर्माण ईपीसी (Engineering, Procurement and Construction) मोड पर किया जाएगा.
महुली गंगा घाट पर बनेगा चार लेन का स्थायी पुल
यह फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के जीन बाबा स्थान (बैरिया) से शुरू होकर खवासपुर और महुली गंगा घाट के रास्ते आरा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जुड़ेगी. इस परियोजना का सबसे अहम हिस्सा महुली गंगा घाट पर बनने वाला चार लेन का स्थायी पुल है. पुल बनने के बाद वर्षों से चली आ रही आवागमन की बड़ी परेशानी खत्म होने की उम्मीद है.
115 किलोमीटर की जगह सिर्फ 30 किलोमीटर का सफर
अभी बैरिया से आरा की सीधी दूरी करीब 30 किलोमीटर है, लेकिन गंगा नदी के कारण लोगों को छपरा होकर करीब 115 किलोमीटर या बक्सर के रास्ते करीब 100 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है.
पुल बनने के बाद दोनों शहरों के बीच दूरी फिर से करीब 30 किलोमीटर रह जाएगी. वहीं पटना की दूरी भी घटकर करीब 90 किलोमीटर हो जाएगी. इससे यात्रा का समय और खर्च दोनों कम होंगे. व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे.
अभी सिर्फ छह महीने मिलता है पीपा पुल का सहारा
महुली गंगा घाट पर हर साल केवल छह महीने के लिए पीपा पुल बनाया जाता है. बारिश शुरू होते ही इसे हटा दिया जाता है. इसके बाद हजारों लोगों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है. कई ग्रामीण आज भी नाव से गंगा पार करने को मजबूर होते हैं. स्थानीय निवासी गांधी राय का कहना है कि स्थायी पुल बनने से यह परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.
सामाजिक और आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती
यह परियोजना सिर्फ सड़क और पुल तक सीमित नहीं है. इससे आरा और बलिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलेगी. स्थानीय निवासी जितेंद्र सिंह का कहना है कि पुल बनने से सीमावर्ती इलाकों का विकास तेज होगा और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.
वर्षों पुरानी मांग अब होती दिख रही पूरी
महुली गंगा घाट पर स्थायी पुल की मांग कई वर्षों से की जा रही थी. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वर्ष 2006 में जयप्रकाश नगर की सभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने इस पुल के निर्माण की मांग उठाई थी. अब NHAI की इस परियोजना से यह सपना पूरा होता नजर आ रहा है.
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चार साल में पूरा होगा निर्माण
परियोजना के तहत चयनित कंपनी को चार साल के भीतर सड़क और पुल का निर्माण पूरा करना होगा. इसके बाद पांच साल तक उसी कंपनी के पास सड़क और पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी रहेगी. इस परियोजना के लिए आरा सदर और बड़हरा अंचल के कुल 21 मौजों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा.
बड़हरा के नूरपुर नौवरार, नूरपुर, कुदरिया, जोकहरी, पकड़ी और गलचौर समेत कई मौजे तथा आरा सदर के सारसिवान, बसंतपुर, बेला, महुली, मथुरापुर, बहिरा चक, भेल डुमरा, पिरौटा, मखदुमपुर, यादवपुर, गरेआ, शोभी डुमरा, हादीव अलीपुर और सिंगही की जमीन इस परियोजना के लिए ली जाएगी.
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