Bhojpuri News : भिखारी ठाकुर की रचनाएं आज भी प्रासंगिक

सजग रचनाकार संस्थान द्वारा गुरुवार को भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती को भिखारी ठाकुर कोईलवर-बबुरा पथ के नजदीक बड़हरा में विशेष रूप से मनाया गया.

आरा. सजग रचनाकार संस्थान द्वारा गुरुवार को भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती को भिखारी ठाकुर कोईलवर-बबुरा पथ के नजदीक बड़हरा में विशेष रूप से मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महेंद्र प्रताप शर्मा ने की जबकि मंच संचालन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोपगुट, भोजपुर के जिला महासचिव उमेश कुमार सुमन ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के तैलीय चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गयी. संस्था के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप शर्मा ने अपने संबोधन में वर्तमान समाज और विगत वर्षों के सामाजिक परिवेश पर प्रकाश डालते हुए भिखारी ठाकुर की रचनाओं का विवरण प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर के नाटकों और गीतों में समाज सुधार और सामाजिक संवेदनाओं का अद्वितीय चित्रण मिलता है. मंच संचालन करते हुए उमेश कुमार सुमन ने कहा कि भिखारी ठाकुर अपने समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण करते थे. उन्होंने यह भी कहा कि आज उनकी रचनाओं को बाजारवाद के माध्यम से पेश किया जा रहा है, जबकि उनके संदेश का मुख्य उद्देश्य समाज सुधार और जन जागरूकता था. कार्यक्रम में उपस्थित अन्य बुद्धिजीवी, साहित्यकार, कलाकार और लेखक भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए. सांस्कृतिक लोकस्वर पत्रिका के प्रधान संपादक राजाराम सिंह “प्रियदर्शी ” ने ठाकुर की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे समाज सुधारकों में अग्रणी स्थान रखते हैं. उन्होंने भिखारी ठाकुर के बारहमासा गीत ”आवेला आसाढ़ मास, लागेला अधिक आस, बरखा में पिया घरे रहितन बटोहिया” को सुनाकर कार्यक्रम में भावनात्मक माहौल बनाया. कमलेश्वर प्रसाद मालाकार ने उनके नाटक ”पियवा नसइल” के परिवार पर प्रभाव और नशे के कारण पारिवारिक ताना-बाना के बिखरने को उजागर किया. संस्थान के सचिव अर्जुन कुमार ठाकुर ने बताया कि भिखारी ठाकुर के नाटकों में महिलाओं की पीड़ा, आर्थिक समस्याओं और समाज की बेदनाओं को बड़े ही मार्मिक ढंग से उकेरा गया है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नवविवाहित पत्नी को छोड़कर पति बाहर काम करने जाता है और उसका दर्द नाटकों में व्यक्त किया गया है. अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि उनके सभी नाटकों में समाज सुधार के संदेश हैं और इसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है. शिव कुमार उर्फ लालाजी ने कहा कि उनके संदेशों को जन जागरण अभियान के तहत लोगों तक पहुंचाना जरूरी है. भोजपुरी जनजागरण संघर्ष समिति के अध्यक्ष कवि सुरेंद्र शर्मा ”विशाल” ने मांग की कि कोइलवर-डोरीगंज पथ को ”भिखारी ठाकुर पथ” के नाम से जाना जाये. अंत में अध्यक्ष महेंद्र प्रताप शर्मा की अनुमति से सभा का समापन किया गया. कार्यक्रम में मनोज कुमार, शिक्षक विजय कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे और भिखारी ठाकुर की रचनाओं और सामाजिक योगदान पर चर्चा कर उसे याद किया गया.

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By SHAH ABID HUSSAIN

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