बिहार की 'पैड वाली मुखिया’ की कहानी, लॉकडाउन में शुरू की यूनिट, अब लाखों महिलाओं की हैं प्रेरणा

Bihar News: भोजपुर की ‘पैड वाली मुखिया’ ने पंचायत स्तर पर सेनेटरी पैड निर्माण शुरू कर कई महिलाओं को रोजगार दिया. उन्होंने 23 रुपये में सस्ती और सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराकर ग्रामीण स्वच्छता की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया.

Bihar News: कोरोना काल में जब लॉकडाउन ने हजारों परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली थी, तब भोजपुर जिले की एक मुखिया ने हालात को अवसर में बदल दिया. जगदीशपुर प्रखंड की दांवा पंचायत की मुखिया सुशुमलता कुशवाहा ने महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड निर्माण की शुरुआत कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की. आज उनकी यह पहल पूरे इलाके में चर्चा का विषय है.

पंचायत में लगा सेमी-ऑटोमेटिक प्लांट

सुशुमलता कुशवाहा ने पंचायत स्तर पर सेमी-ऑटोमेटिक मशीन लगाकर ‘संगिनी’ ब्रांड के नाम से सेनेटरी पैड का उत्पादन शुरू कराया. इसके लिए उन्हें सरकारी योजना के तहत करीब 10 लाख रुपये का फंड मिला. कुछ अतिरिक्त राशि जोड़कर पूरा प्लांट तैयार किया गया.

इस यूनिट में 10 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है. ये महिलाएं कच्चा माल डालने से लेकर कटिंग, फोल्डिंग, पैकिंग और बिक्री तक का सारा काम खुद संभालती हैं. रोज 8 घंटे की शिफ्ट में लगभग 4,500 पैड तैयार हो जाते हैं.

सिर्फ 23 रुपये में 6 पैड

‘संगिनी’ ब्रांड के पैड अल्ट्रा-थिन और एक्स्ट्रा लार्ज साइज में तैयार किए जाते हैं. इनकी क्षमता 100 मिलीलीटर तक है. खास बात यह है कि 6 पैड का एक पैकेट सिर्फ 23 रुपये में मिल रहा है. बाजार के मुकाबले यह काफी सस्ता है.

जीविका दीदियां इन्हें आसपास के गांवों और पंचायतों में बेच रही हैं. इससे न केवल सस्ती सुविधा मिल रही है, बल्कि महिलाओं की आमदनी भी बढ़ रही है.

हिचक तोड़ी, जागरूकता बढ़ाई

शुरुआत में गांवों में सेनेटरी पैड को लेकर काफी झिझक थी. कई घरों में अब भी कपड़े के इस्तेमाल की परंपरा थी. इस सोच को बदलना आसान नहीं था. मुखिया और उनकी टीम ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया. महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में समझाया. अब खासकर युवा लड़कियों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है.

आगे की बड़ी योजना

सुशुमलता कुशवाहा का लक्ष्य सिर्फ अपनी पंचायत तक सीमित नहीं है. वह इस उत्पाद को दूसरे जिलों तक पहुंचाना चाहती हैं. साथ ही सरकारी गर्ल्स हॉस्टल्स में सप्लाई की भी योजना है.

यह पहल महिलाओं को आर्थिक मजबूती दे रही है. साथ ही ग्रामीण समाज में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति नई सोच भी पैदा कर रही है. भोजपुर की यह ‘पैड वाली मुखिया’ अब बदलाव की नई पहचान बन चुकी हैं.

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Published by: Abhinandan Pandey

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