प्रतिनिधि, कुर्साकांटा प्रखंड क्षेत्र से बहने वाली बकरा नदी के तीरा घाट पर आज भी बांस की चचरी के सहारे ही आवागमन को ग्रामीण मजबूर हैं. इधर लगातार हो रही बारिश के कारण गुरुवार को नदी का जलस्तर में वृद्धि देखी गयी. जिससे नदी किनारे रह रहे लोगों ने बताया कि ऐसी ही बारिश होती रही तो घाट पर आवागमन का जरिया बना चचरी पुल भी साथ छोड़ जायेगा. बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ते ही नदी की तेज धारा चचरी को बहा ले जाती है. फिर बरसात का मौसम में नवम्बर दिसंबर तक नाव के सहारे आवागमन होता है.
गत वर्ष तीरा घाट पर पुल का टेंडर व मापी होने से जगी थी उम्मीदगत वर्ष तीरा घाट पर पुल निर्माण की घोषणा मात्र से अगल बगल के ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि अब चचरी का पुल व नाव से मुक्ति मिलेगी. लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार पुल का टेंडर कैंसिल होने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों चेहरे पर मायूसी छाई रही. ग्रामीणों को उम्मीद अब भी कायम है कि आने वाले दिनों में घाट पर पुल बनेगा. बता दें कि तीरा घाट दो प्रखंड कुर्साकांटा व सिकटी को जोड़ने वाली लाइफ लाइन है. यदि तीरा घाट पर पुल बन जाए तो कुर्साकांटा से सिकटी जाने में जहां आठ किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ेगा. वहीं तीरा घाट पर पुल नहीं रहने से ग्रामीणों को कुआड़ी के रास्ते लगभग 16 किलोमीटर की दूरी तय कर सिकटी प्रखंड मुख्यालय जाया जा सकता है.
पुल निर्माण कार्य अविलंब शुरू करने की मांगग्रामीणों में शामिल समाजसेवी भूपेंद्र नारायण सिंह, प्रेम प्रकाश सिंह, श्रवण सिंह, पंसस देवेंद्र कुमार सिंह, प्रणव गुप्ता, पूर्व मुखिया मो मुश्ताक अली, मो वारिश, विद्यानंद पासवान, धर्मनाथ सिंह, मो बेचन अली, मुखिया प्रतिनिधि अरविंद मंडल, पंसस सुमन झा,नुनु लाल मिश्र,शोभाकांत मिश्र,बीरेंद्र झा,रजनीकांत झा, गणेश झा, प्रदीप यादव, मंटू यादव, प्रकाश यादव समेत दर्जनों लोगों ने जिला प्रशासन से बकरा नदी पर तीरा घाट पर पुल निर्माण कार्य अविलंब शुरू करने की मांग की है.
