फारबिसगंज . मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना में दर्ज ₹2 करोड़ 75 लाख 68 हजार 731 रुपये के कथित गबन मामले में फरार चल रहे फारबिसगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) रणधीर लाल की गिरफ्तारी के लिए मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना की पुलिस शुक्रवार देर रात फारबिसगंज पहुंची. स्थानीय थाना पुलिस के सहयोग से पुलिस ने उनके आवास और शनिवार दोपहर नगर परिषद कार्यालय में छापेमारी की, लेकिन रणधीर लाल कहीं नहीं मिले. इसके बाद पुलिस टीम वापस लौट गई.
पहले आवास, फिर कार्यालय में हुई तलाशी
पुलिस टीम ने सबसे पहले शुक्रवार देर रात रणधीर लाल के फारबिसगंज स्थित आवास पर छापेमारी की, लेकिन मकान बंद मिला. इसके बाद शनिवार को नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर उनके कक्ष की तलाशी ली गई. इस दौरान प्रभारी प्रधान सहायक कामाख्या नारायण उर्फ कुंदन सिंह सहित अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की गई. कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें ईओ के वर्तमान ठिकाने की जानकारी नहीं है.
पुलिस पहुंचते ही कार्यालय में मचा हड़कंप
साहेबगंज थाना के अनुसंधानकर्ता सह मामले के जांच अधिकारी कुणाल कुमार ने बताया कि गबन मामले में गिरफ्तारी के उद्देश्य से छापेमारी की गई. उन्होंने कहा कि यदि आरोपित न्यायालय में समर्पण नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध वारंट, कुर्की और इश्तेहार की कार्रवाई के लिए न्यायालय से अनुरोध किया जाएगा. स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुलिस टीम के फारबिसगंज पहुंचने की सूचना मिलते ही रणधीर लाल कार्यालय से निकल गए, जिससे नगर परिषद कार्यालय में हड़कंप मच गया.
क्या है पूरा मामला
साहेबगंज नगर परिषद के वर्तमान ईओ मो. फिरोज ने 24 अप्रैल 2026 को साहेबगंज थाना में कांड संख्या 344/26 दर्ज कराया था. प्राथमिकी में तत्कालीन ईओ रणधीर लाल पर नगर विकास एवं आवास विभाग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर खरीद और भुगतान में भारी अनियमितता करने का आरोप लगाया गया है.
स्ट्रीट लाइट भुगतान में अनियमितता का आरोप
एफआईआर के अनुसार बिना नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए 300 स्ट्रीट लाइट, एक रिफ्यूज कॉम्पेक्टर, सात एवं 20 हाई मास्ट लाइटिंग टावर तथा 50 सीसीटीवी कैमरों की खरीद की गई. सबसे गंभीर आरोप यह है कि कटिहार की एक एजेंसी से खरीदी गई 503 स्ट्रीट लाइट का अधिष्ठापन (इंस्टॉलेशन) किए बिना ही भुगतान कर दिया गया, जबकि निविदा में कुल 3000 स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रावधान था. आरोप है कि एजेंसी को महज चार दिनों के भीतर ही ₹2 करोड़ 75 लाख 68 हजार 731 रुपये का भुगतान कर दिया गया.
जांच जारी
पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है. छापेमारी अभियान में साहेबगंज थाना के अनुसंधानकर्ता कुणाल कुमार, पुलिस जवान पिंटू कुमार तथा फारबिसगंज थाना के अवर निरीक्षक अमित राज, उपेंद्र शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे. पुलिस का कहना है कि आरोपित की गिरफ्तारी के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी.
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