फारबिसगंज निवासी हंसराजजी बच्छावत के निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान कर मानव सेवा की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है. इस निर्णय से दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में रोशनी लौटने की उम्मीद जगी है.
परिवार ने लिया प्रेरणादायक फैसला
हंसराजजी बच्छावत के निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी राधादेवी बच्छावत, पुत्री दीपिका बैद और दामाद पंकज बैद ने "अंधकार मिटाएं, रोशनी फैलाएं" के संकल्प के साथ नेत्रदान कराने का निर्णय लिया. इसकी सूचना तत्काल तेरापंथ युवक परिषद, फारबिसगंज को दी गई.
मेडिकल टीम ने सफलतापूर्वक किया कॉर्निया संग्रह
सूचना मिलते ही अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (बिहार) के नेत्रदान प्रभारी आशीष गोलछा ने कटिहार की मेडिकल टीम से समन्वय स्थापित किया. डॉक्टर अभय यादव, डॉक्टर समीक्षा और डॉक्टर इरा की टीम ने निर्धारित समय के भीतर सफलतापूर्वक कॉर्निया प्राप्त किया.
शहर का 26वां नेत्रदान
इस दौरान तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पंकज नहाटा, श्रेयांश बैद, मुकेश राखेचा, अंजनी गौतम, दीपक समदरिया, संजय बैद, मनोज बच्छावत, अंकित झावक और अजातशत्रु अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. सभी ने शोकाकुल परिवार के साहस और निर्णय की सराहना की.
दधीचि देहदान समिति के जिला अध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल ने कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा महादान है. दुख की घड़ी में लिया गया ऐसा निर्णय समाज के लिए प्रेरणा है. उन्होंने बताया कि तेरापंथ युवक परिषद और दधीचि देहदान समिति के जागरूकता अभियान के तहत यह शहर का 26वां नेत्रदान है.
प्रमुख बातें
- हंसराजजी बच्छावत के निधन के बाद परिजनों ने कराया नेत्रदान.
- दो दृष्टिबाधित लोगों को मिलेगी नई रोशनी.
- कटिहार की मेडिकल टीम ने सफलतापूर्वक कॉर्निया संग्रह किया.
- शहर में यह 26वां नेत्रदान बताया गया.
- समाज के लोगों ने परिवार के निर्णय की सराहना की.
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