बिहार में हर घर से 1200 रुपये टैक्स वसूली का दावा बेबुनियाद, सीएम सम्राट चौधरी ने कर दिया साफ

Bihar CM Samrat Choudhary: बिहार की ग्राम पंचायतों में हर घर से सालाना 1200 रुपये टैक्स वसूली के दावों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने साफ किया कि सरकार के पास ऐसा कोई मामला विचाराधीन नहीं है और गांवों में टैक्स लगाने की खबरें बेबुनियाद हैं.

Bihar CM Samrat Choudhary: बिहार के गांवों और पंचायतों में टैक्स वसूली की खबरों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरी तरह विराम लगा दिया है. सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चल रहे उन दावों का मुख्यमंत्री ने कड़ाई से खंडन किया है, जिसमें कहा जा रहा था कि अब गांवों में भी नगर निगम की तर्ज पर हर घर से सालाना औसतन 1200 रुपये का टैक्स वसूला जाएगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अररिया में कहा कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई भी मामला नहीं है और टैक्स वसूली के ये दावे पूरी तरह गलत हैं.



क्या था सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा प्रस्ताव

पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि बिहार सरकार गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. वायरल खबरों में दावा किया जा रहा था कि पंचायती राज विभाग ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है जिसे वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है. इस कथित प्रस्ताव के तहत हर ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र के आवासीय और व्यावसायिक भवनों से होल्डिंग टैक्स के साथ-साथ पानी, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के लिए सालाना शुल्क वसूलने का अधिकार मिलने की बात कही जा रही थी.

हर घर नल का जल पर भी शुल्क की थी चर्चा

कथित प्रस्ताव में यह भी कहा जा रहा था कि गांवों में शहरों जैसी सुविधाएं देने और पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत यह टैक्स लगाया जा रहा है. हर घर नल का जल योजना के तहत मिलने वाली पेयजल आपूर्ति के लिए भी अनिवार्य शुल्क लेने की बात सामने आई थी. चर्चा यह भी थी कि दुकानों, गोदामों और मुख्य सड़क पर स्थित व्यावसायिक मकानों से सामान्य घरों की तुलना में अधिक टैक्स वसूला जाएगा ताकि पंचायतों की अपनी आमदनी बढ़ सके और उनकी सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम हो.

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मुख्यमंत्री के बयान से मिली राहत

इन तमाम दावों और अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद सामने आकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. उन्होंने गांवों में किसी भी तरह के नए टैक्स या सालाना 1200 रुपये की वसूली की बात को सिरे से नकार दिया है. मुख्यमंत्री के इस आधिकारिक खंडन के बाद बिहार के ग्रामीण इलाकों के लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है और यह साफ हो गया है कि फिलहाल पंचायतों में ऐसी कोई भी टैक्स व्यवस्था लागू नहीं होने जा रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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