बेला व पोखरिया मौजा में सबसे अधिक हेराफेरी
भूअर्जन घोटाला कार्रवाई के लिए सरकार के निर्देश का इंतजार... तीन सौ से अधिक खेसरा पर सरकार को लेना है निर्णय अररिया : भारत-नेपाल सीमा सड़क निर्माण के लिए जिले के चार प्रखंडों में अधिग्रहीत की गयी जमीनों के प्रकृति निर्धारण में हुई कथित हेराफेरी को लेकर जांच का सिलसिला अब भी पूरा नहीं हो […]
भूअर्जन घोटाला कार्रवाई के लिए सरकार के निर्देश का इंतजार
तीन सौ से अधिक खेसरा पर सरकार को लेना है निर्णय
अररिया : भारत-नेपाल सीमा सड़क निर्माण के लिए जिले के चार प्रखंडों में अधिग्रहीत की गयी जमीनों के प्रकृति निर्धारण में हुई कथित हेराफेरी को लेकर जांच का सिलसिला अब भी पूरा नहीं हो पाया है. क्योंकि दो प्रखंडों सिकटी व कुर्साकांटा में छह सदस्यीय कमेटी का स्थल निरीक्षण अभी नहीं हो पाया है. अलबत्ता नरपतगंज प्रखंड में जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. जांच के बाद तीन सौ से अधिक खेसरा में हुई हेराफेरी की रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा सरकार को भेज दी गयी है. सरकार के निर्देश के आलोक में ही प्रकृति पर अंतिम निर्णय लिये जाने की संभावना है.
जिला भूअर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक डीएम हिमांशु शर्मा के निर्देश के आलोक में शुरू हुई जांच के बाद प्रकृति निर्धारण की जो अंतिम रिपोर्ट आयी, उसके मुताबिक पूर्व में निर्धारित प्रकृति को बदलते हुए कुल 306 खेसरा की जमीन को कृषि से आवासीय कर दिया गया है. ऐसा सबसे अधिक बेला व पोखरिया मौजा के साथ हुआ है. जानकारी के मुताबिक बेला के 97 व पोखरिया के 44 खेसरा की जमीन को कृषि में डाल दिया गया है, जबकि भैरोगंज मौजा के 23, भेरहर के 28, घुराना के 15, गुवारपुछरी के 16 खेसरा की जमीनों की प्रकृति को कृषि ठहराया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक नरपतगंज के छह खेसरा ऐसा भी है जिसे अधिकारियों की जांच के बाद कृषि से आवासीय में बदल देने की अनुशंसा की गयी है. जबकि नरपतगंज के 16 मौजों में कुल 257 खेसरा के प्रकृति निर्धारण में पेंच फंसा है. क्योंकि इन सभी खेसरों की अधिग्रहीत जमीन आवासीय क्षेत्र के 200 मीटर के दायरे में तो हैं. बताया जाता है कि निबंधन कार्यालय में अपनाये जाने वाले नियमों के अनुसार आवासीय जमीन के 200 मीटर के दायरे में आने वाली जमीन भी आवासीय मानी जाती है. पर ऐसा कोई निर्णय लेने के बजाये जिला प्रशासन ने सरकार से स्पष्ट निर्देश मांगा है.
कार्यालय सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार को पूरी रिर्पोट भेज दी गयी है. निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई हो सकेगी. वहीं बताया गया कि कुर्साकांटा व सिकटी प्रखंडों में अधिग्रहीत जमीनों की जांच अलग-अलग अधिकारियों की टीम कर चुकी है. रिपोर्ट भी कार्यालय को सौंपी जा चुकी है. पर छह सदस्यीय कमेटी की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जायेगा.
जांच के बाद आवासीय से कृषि
प्रकृति में बदलाव
मौजा कुल खेसरा
घुरना 15
भोडहर 28
महेशपट्टी 06
नवाबगंज 06
मानिकपुर 06
डुमरबन्ना 00
चकोरवा 07
भैरोगंज 23
पथराहा 02
बबुआन 00
बसमतिया 00
कोचगामा 18
पोखरिया 44
बेला 97
सोनापुर 28
गुवारपुछरी 16
