कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की जुडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 57 किग्रा वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया. फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड की असेल्या टोप्राक से हुआ. दोनों खिलाड़ियों के बीच शुरुआत से ही बेहद रोमांचक और कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां कोई भी खिलाड़ी आसानी से बढ़त नहीं बना सकी.
तीसरे शिडो ने तोड़ी गोल्ड की उम्मीद
निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच कोई निर्णायक स्कोर नहीं बन पाया, जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया. अतिरिक्त समय में यामिनी को तीसरा शिडो (पेनल्टी) मिला. जुडो के नियमों के अनुसार तीसरा शिडो मिलने पर खिलाड़ी को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है. इसी फैसले के साथ इंग्लैंड की असेल्या टोप्राक को विजेता घोषित किया गया और यामिनी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा. मुकाबले के अंतिम क्षणों तक यामिनी ने शानदार संघर्ष किया, लेकिन निर्णायक पेनल्टी उनके लिए भारी पड़ गई.
फाइनल तक शानदार रहा यामिनी का सफर
यामिनी ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया. सेमीफाइनल में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेटनबाख को इप्पोन (100-0) से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था. खिताबी मुकाबले में भी उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन आखिर में स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से चूक गईं.
भारत ने जुडो में रचा नया इतिहास
यामिनी के रजत पदक के साथ भारत का जुडो अभियान ऐतिहासिक रहा. इससे पहले अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जुडो का पहला भारतीय गोल्ड दिलाया था. इसके बाद हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा वर्ग में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराकर भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया.
दो गोल्ड और एक सिल्वर के साथ खत्म हुआ जुडो का अभियान
यामिनी यदि फाइनल जीत जातीं तो भारत एक ही दिन में जुडो में तीन स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर देता. हालांकि, उनके रजत पदक के साथ भारत ने दो स्वर्ण और एक रजत जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जुडो का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया. अस्मिता डे, हर्ष सिंह और यामिनी मौर्य की उपलब्धियों ने भारतीय जुडो के लिए ग्लास्गो में एक नया अध्याय लिख दिया.
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