डेनियल विटोरी ने कहा -सनराइजर्स के गेंदबाजों ने बहुत खराब गेंदबाजी की, जिसकी वजह से हम हारे

IPL 2026 : आईपीएल सीजन 19 की शुरुआत हार से करने पर सनराइजर्स हैदराबाद के कोच डेनियल विटोरी काफी खफा नजर आए और उनका गुस्सा टीम के गेंदबाजों पर फूटा. उन्होंने कहा कि टीम के गेंदबाजों ने बहुत ही लचर और बिना रणनीति के गेंदबाजी की जिसकी वजह से टीम अपने स्कोर को डिफेंड नहीं कर पाई.

IPL 2026 : आईपीएल के पहले मैच में आरसीबी से हारने के बाद सनराइजर्स हैदराबाद के मुख्य कोच डेनियल विटोरी ने कहा कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के खिलाफ हमारी टीम ने बहुत खराब गेंदबाजी की. विटोरी ने कहा कि गेंदबाजों ने मैच में विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल को रन बनाने के काफी मौके दिये. सनराइजर्स ने सीजन के पहले मैच में नौ विकेट पर 201 रन बनाये थे, जिसे बहुत खराब स्कोर नहीं कहा जा सकता है, लेकिन उनके गेंदबाज अपने रन को डिफेंड नहीं कर पाए. आरसीबी ने लक्ष्य को 15.4 ओवर में ही हासिल कर लिया.

गेंदबाजी बहुत लचर थी, जिसने मैच हरा दिया

मैच के बाद किए गए प्रेस कांफ्रेंस में डेनियल विटोरी ने कहा कि आपको गेंदबाजी से अच्छी शुरूआत की जरूरत थी जो फिल साल्ट का विकेट लेकर की भी , लेकिन हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके. हमने अनुशासित गेंदबाजी नहीं की. विराट और पडिक्कल को रन बनाने के काफी मौके दिये जिन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया.

पहला मैच हारना खराब रणनीति का परिणाम

विटोरी ने कहा कि सनराइजर्स के गेंदबाजों ने अच्छी गेंदबाजी की, जिससे हमारी टीम को सीख लेना चाहिए था, लेकिन टीम के खिलाड़ियों ने ऐसा नहीं किया, जिसकी वजह से आरसीबी के खिलाड़ियों को रन बनाने का अच्छा मौका मिला.आईपीएल की शुरुआत में ही मैच हारना अच्छी बात नहीं है, क्योंकि हर मैच महत्वपूर्ण होता है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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