IPL 2024 : 1 टेस्ट और 2 ODI खेलने वाले टी नटराजन ने पर्पल कैप पर जमाया कब्जा, जसप्रीत बुमराह को पछाड़ा

IPL 2024 के सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद ने अपना डंका बजा दिया है. एक ओर जहां टी-20 के इतिहास का सर्वाधिक रन इस टीम ने बनाया है, वहीं अब पर्पल पर इसी टीम के टी नटराजन का कब्जा हो गया है.

IPL 2024 : आईपीएल 2024 में जहां एक से बढ़कर एक रिकाॅर्ड बन रहे हैं, वहीं अब आॅरेंज कैप वाला खिलाड़ी भी चर्चा में है. सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाडी टी नटराजन ने गुरुवार को खेले गए राजस्थान राॅयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद की मैच में इस सीजन का 15 विकेट लेकर जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी से पर्पल कैप छीन लिया है. तमिलनाडु के सलेम जिले के रहने वाले 33 वर्षीय टी नटराजन ने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खिंचा है. नटराजन ने इस सीजन में अबतक आठ मैच खेलकर 15 विकेट लिए हैं. टी नटराजन काफी गरीब परिवार से हैं और इन्होंने काफी संघर्ष करके आईपीएल तक का सफर तय किया है. वे आईपीएल में पहले पंजाब की तरफ से खेल चुके हैं. नटराजन ने अपने करियर में एक टेस्ट, दो ओडीआई और 89टी-20 मैच खेले हैं.नटराजन के पिता एस थंगारासू एक बुनकर थे, जबकि मां फास्ट-फूड स्टॉल चलाती थीं. नटराजन पांच भाई-बहन हैं.

जसप्रीत बुमराह को पछाड़ा

आईपीएल 2024 के इस सीजन में पर्पल कैप की रेस में जो टाॅप पांच खिलाड़ी हैं, उनमें से तीन खिलाड़ी भारतीय है. पहले नंबर पर टी नटराजन हैं. दूसरे स्थान पर जसप्रीत बुमराह है, जिन्होंने 10 मैच में 14 विकेट लिए हैं और उनकी इकोनॉमी 6.40 रन की है, जबकि नटराजन की 8.96 की है. तीसरे स्थान पर मुस्तफिजुर रहमान हैं, जो बांग्लादेशी हैं और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हैं. मुस्तफिजुर ने अबतक नौ मैच खेले हैं और 14 विकेट लिए हैं, इनका इकोनॉमी रेट 9.26 है.

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युजवेंद्र चहल छठे नंबर पर खिसके

पर्पल कैप की रेस में चौथे नंबर पर पंजाब के हर्षल पटेल हैं, जिन्होंने 10 मैच खेलकर 14 विकेट लिए हैं. इनकी इकोनॉमी 10.24 की है. पांचवें स्थान पर श्रीलंका के खिलाड़ी मथीशा पथिराना हैं, जिन्होंने छह मैच खेलकर 13 विकेट लिए हैं और इनकी इकोनॉमी 7.68 रनों की है. मुस्तफिजुर और हर्षल पटेल ने अपने प्रदर्शन के बल पर टाॅप फाइव में जगह बनाई है, जबकि शुरुआती दौर में युजवेंद्र चहल टाॅप में चल रहे थे और अब वे छठे नंबर पर हैं. उन्होंने 10 मैच खेलकर 13 विकेट लिए हैं और इकोनॉमी 9.68 की है.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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