भारतीय क्रिकेट के 'विजनरी' IS Bindra का निधन, जिसने BCCI को बनाया अमीर, राजीव शुक्ला और भज्जी ने जताया शोक

IS Bindra Passes Away: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंदरजीत सिंह बिंद्रा अब हमारे बीच नहीं रहे. 84 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली में उनका निधन हो गया. उनके जाने से भारतीय क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. बिंद्रा वो शख्स थे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को आधुनिक बनाने और उसे आर्थिक रूप से मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी. उनके निधन पर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) ने गहरा दुख जताया है और उनके योगदान को याद किया है.

IS Bindra Passes Away: इसके अलावा टीम इंडिया के कई पूर्व क्रिकेटर ने भी पूर्व अध्यक्ष इंदरजीत सिंह बिंद्रा (Inderjit Singh Bindra) के निधन पर शोक जताया. इसमें पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह और मनोज तिवारी का नाम शामिल है. आईएस बिंद्रा को एक ऐसे प्रशासक के तौर पर याद किया जाएगा जिन्होंने 90 के दशक में क्रिकेट को देखने और दिखाने का नजरिया बदल दिया था.

राजीव शुक्ला ने बताया ‘विजनरी’ लीडर

बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना दुख साझा किया. उन्होंने बिंद्रा को एक दूरदर्शी नेता बताया. राजीव शुक्ला ने लिखा कि आईएस बिंद्रा के निधन की खबर सुनकर उन्हें गहरा धक्का लगा है. शुक्ला ने याद किया कि उन्होंने बिंद्रा के साथ बीसीसीआई में काम किया था.

राजीव शुक्ला ने कहा, मैंने उनके साथ काम किया है और पाया कि वो एक विजनरी लीडर थे. ये बिंद्रा ही थे जिन्होंने ब्रॉडकास्ट राइट्स (मैच दिखाने के अधिकार) बेचकर बीसीसीआई के लिए राजस्व यानी कमाई का नया रास्ता खोला था. भारतीय क्रिकेट प्रशासन में उनके इस भारी योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ओम शांति.

हरभजन सिंह ने जताया शोक

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा आई एस बिंद्रा सर एक असाधारण प्रशासक थे. जिन्होंने भारतीय सरकार में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ सेवा दी और समाज के हर वर्ग में सम्मान पाया. पंजाब क्रिकेट की मजबूती में उनका योगदान सबसे बडा रहा. उनके दूरदर्शी सोच, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग के बिना पंजाब क्रिकेट आज जिस मुकाम पर है, वहां तक पहुंचना संभव नहीं था. भारतीय क्रिकेट के लिए भी उनका योगदान बेहद अहम रहा.

आगे भज्जी लिखते है कि वह हमेशा अपने खिलाडियों के साथ खडे रहे. हर कदम पर मदद करने, सहारा देने और सही रास्ता दिखाने के लिए वह तैयार रहते थे. निजी तौर पर वह मेरे लिए पिता समान थे. उन्होंने मुझे जीवन में हमेशा सही काम करने के लिए प्रेरित किया. उनकी समझदारी और सादगी ने न केवल करियर को दिशा दी, बल्कि जीवन को भी बेहतर बनाया.

यह मेरे लिए एक गहरा और निजी नुकसान है. सर, आपकी जगह कोई नहीं ले सकता. आप भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जो छाप आपने हम सभी के जीवन पर छोडी है, वह हमेशा बनी रहेगी. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे.

मनोज तिवारी ने दी श्रद्धांजलि

आई एस बिंद्रा सर, आपकी आत्मा को शांति मिले. एक प्रशासक के रूप में भारतीय क्रिकेट को करोडों की इंडस्ट्री बनाने में आपका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. देश के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है.

मेरी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं. ओम शांति.

पंजाब क्रिकेट के भीष्म पितामह

आईएस बिंद्रा सिर्फ बीसीसीआई ही नहीं, बल्कि पंजाब क्रिकेट के भी पर्याय माने जाते थे. पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) ने भी अपने पूर्व अध्यक्ष के निधन पर शोक व्यक्त किया है. पीसीए ने कहा कि बिंद्रा की लीडरशिप और उनकी दूरदृष्टि ने भारतीय क्रिकेट को आकार देने में बड़ी मदद की.

PCA ने अपने पोस्ट में लिखा, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन आई.एस. बिंद्रा के निधन पर शोक व्यक्त करता है. वो एक विजनरी प्रशासक थे. उनके नेतृत्व और अटूट समर्पण ने भारतीय क्रिकेट के विकास और कामकाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे. आपको बता दें कि ईएसपीएन क्रिकइन्फो के मुताबिक, बिंद्रा 1978 से 2014 तक रिकॉर्ड 36 साल तक पीसीए के अध्यक्ष रहे थे.

मोहाली स्टेडियम है उनकी सबसे बड़ी विरासत

आईएस बिंद्रा की सबसे बड़ी और कभी न भूलने वाली विरासतों में से एक मोहाली का पीसीए स्टेडियम है. बंजर जमीन को एक वर्ल्ड क्लास स्टेडियम में बदलने का सपना बिंद्रा ने ही देखा था और उसे पूरा भी किया. बाद में इस स्टेडियम का नाम बदलकर उनके सम्मान में ‘आईएस बिंद्रा स्टेडियम’ कर दिया गया.

बिंद्रा 1993 से 1996 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे. यह वो दौर था जब उन्होंने जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर 1987 और 1996 के वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत में कराने में अहम रोल निभाया था. उन्होंने ही क्रिकेट को सरकारी टीवी चैनल से हटाकर प्राइवेट ब्रॉडकास्टर्स तक पहुंचाया, जिससे बोर्ड मालामाल हुआ.

ऐतिहासिक मैचों का गवाह बना उनका स्टेडियम

जिस मोहाली स्टेडियम को बिंद्रा ने तैयार किया, उसने भारतीय क्रिकेट इतिहास के कई यादगार मैच देखे हैं. इसी मैदान पर 2011 आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप का वह हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल खेला गया था, जो भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. उस मैच में सचिन तेंदुलकर ने यादगार 85 रन बनाए थे और भारत ने पाकिस्तान को हराया था.

इसके अलावा, 2016 टी20 वर्ल्ड कप का वह ‘करो या मरो’ वाला मुकाबला भी इसी मैदान पर हुआ था, जिसमें विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 82 रन बनाकर भारत को रोमांचक जीत दिलाई थी और टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया था. बिंद्रा का जाना क्रिकेट प्रशासन के एक सुनहरे युग का अंत है.

ये भी पढ़ें-

युवराज सिंह का रिकॉर्ड तोडने से चूके अभिषेक शर्मा, सिर्फ 14 गेंदों में जड़ी फिफ्टी, फिर गुरु ने ली मजे-मजे में क्लास

T20 World Cup 2026: बांग्लादेश ने टेक दिए घुटने, ICC के फैसले को नहीं देगा चुनौती, स्कॉटलैंड को मिला वर्ल्ड कप का टिकट

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Aditya Kumar Varshney

आदित्य वार्ष्णेय एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जो वर्तमान में कंटेंट राइटर के रूप में प्रभात खबर के साथ जुड़े हुए हैं. वह पिछले 5 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और स्पोर्ट्स बीट में गहरी पकड़ रखते हैं. आपका मुख्य लेखन क्षेत्र क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी है, जहां वह मैच रिपोर्ट, विश्लेषणात्मक लेख, फीचर स्टोरी और एक्सप्लेनर आधारित कंटेंट तैयार करते हैं. आपने मुख्य रूप से डिजिटल न्यूज और फीचर स्टोरीज पर केंद्रित रहा है, जिसमें खेल घटनाओं की गहराई से व्याख्या और तथ्यात्मक प्रस्तुति शामिल है. आपने प्रभात खबर से पहले भारत समाचार में असिस्टेंट प्रोड्यूसर (आउटपुट विभाग) के रूप में काम किया है, वहीं स्टार स्पोर्ट्स में असिस्टेंट प्रोड्यूसर (क्रिकेट, हिंदी फीड) के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं. इससे उन्हें ब्रॉडकास्ट और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म का मजबूत अनुभव मिला है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >