जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 से पहले भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने खिलाड़ियों की तैयारियों में एक नया कदम उठाया है. खेलों के दौरान खिलाड़ियों को स्थानीय भोजन के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी न हो, इसके लिए बेंगलुरु स्थित SAI के नेताजी सुभाष दक्षिण केंद्र में इन दिनों जापानी व्यंजन परोसे जा रहे हैं.
खिलाड़ियों को एवाकाडो और खीरे की सुशी, जापानी मछली हामाची, नूडल्स और जापानी रोल जैसे पारंपरिक व्यंजन खिलाए जा रहे हैं, ताकि वे जापान के खानपान के अभ्यस्त हो सकें और प्रतियोगिता के दौरान भोजन को लेकर किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
टोक्यो और पेरिस के अनुभव से लिया सबक
SAI के नेताजी सुभाष दक्षिण केंद्र के कार्यकारी शेफ जयराज ने पीटीआई से कहा कि यह पहल खिलाड़ियों के हित को ध्यान में रखकर शुरू की गई है.
एशियन गेम्स जापान में होने हैं और हम चाहते हैं कि हमारे खिलाड़ियों को वहां के खाने से कोई परेशानी न हो. इसी वजह से हमने अपने मेन्यू में जापानी व्यंजन शामिल किए हैं.
पूर्व सैन्य शेफ रह चुके जयराज ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक और पेरिस ओलंपिक के दौरान कुछ भारतीय खिलाड़ियों को भोजन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा था. पेरिस पैरालंपिक के दौरान तो भारतीय दल के लिए करीब 1,800 एनर्जी बार भेजने पड़े थे. इन्हीं अनुभवों को देखते हुए इस बार पहले से तैयारी की जा रही है.
धीरे-धीरे बदला गया खिलाड़ियों का मेन्यू
जयराज ने बताया कि खिलाड़ियों को अचानक जापानी खाना परोसने के बजाय उन्हें धीरे-धीरे इसकी आदत डाली गई. शुरुआत जापानी शैली की हाई-टी और मिठाइयों से हुई. इसके बाद स्नैक्स और फिर मुख्य भोजन में सुशी, साशिमी और अन्य जापानी व्यंजन शामिल किए गए.
उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल से सप्ताह में दो दिन खिलाड़ियों को कॉन्टिनेंटल भोजन भी दिया जा रहा है, ताकि वे अलग-अलग देशों के खानपान के अनुरूप खुद को आसानी से ढाल सकें. पिछले वर्ष जब भारतीय हॉकी टीम चिली दौरे पर गई थी, तब भी इसी तरह की तैयारी कराई गई थी.
विदेशी खानपान के साथ तालमेल बैठाना भी जरूरी
SAI का मानना है कि खिलाड़ियों की सफलता केवल प्रशिक्षण और फिटनेस पर ही नहीं, बल्कि विदेशी परिस्थितियों और खानपान के साथ जल्दी तालमेल बैठाने पर भी निर्भर करती है. यही वजह है कि एशियाई खेलों से पहले भोजन को भी तैयारियों का अहम हिस्सा बनाया गया है.
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