भारतीय खेल जगत में 12 अगस्त क्यों है खास? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

12 अगस्त भारतीय हॉकी के लिए एक खास दिन है, जिस दिन देश ने दो बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा. आजाद भारत का पहला ओलंपिक गोल्ड 1948 में लंदन में आया, जिसके 8 साल बाद 1956 में मेलबर्न में एक और स्वर्णिम जीत दर्ज की गई.

Gold Medal In Hockey: भारतीय हॉकी के लिए कैलेंडर की तारीखें सिर्फ दिन और महीने का हिसाब नहीं हैं. कुछ तारीखें ऐसी हैं, जिनसे मैदान पर मिली जीत, देश की भावनाएं और खिलाड़ियों की मेहनत की कहानी जुड़ी हुई है. 12 अगस्त भी ऐसी ही तारीख है. इस दिन भारतीय हॉकी ने ओलंपिक में ऐसे मुकाम हासिल किए, जिनकी चर्चा आज भी होती है. खास बात यह है कि 12 अगस्त को भारत ने ओलंपिक में दो बार गोल्ड मेडल जीतकर इस दिन को हॉकी के लिए खास बना दिया.

आजाद भारत का पहला ओलंपिक गोल्ड

12 अगस्त 1948 को लंदन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम मैदान पर उतरी. देश को आजाद हुए अभी सिर्फ एक साल हुआ था. इससे पहले भारत ओलंपिक में हिस्सा लेता रहा था, लेकिन यह पहला मौका था जब भारतीय खिलाड़ी तिरंगे के नीचे मैदान में उतर रहे थे. फाइनल में भारत के सामने वही ब्रिटेन था, जिसने करीब दो शताब्दियों तक भारत पर शासन किया था.

फेमस वेम्बली में खेला गया मैच

मुकाबला लंदन के मशहूर वेम्बली स्टेडियम में खेला गया. करीब 10 हजार दर्शकों के सामने भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए ब्रिटेन को 4-0 से हरा दिया. बारिश से मैदान गीला था और परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के पास बेहतरीन गेंद नियंत्रण, सटीक पासिंग और शानदार तालमेल था. ब्रिटेन के खिलाफ जीत के साथ भारतीय टीम ने स्वतंत्र भारत के लिए पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल जीत लिया.

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बंटवारे के बाद बदली थी टीम की तस्वीर

1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन साथ ही विभाजन का दर्द भी मिला. इसका असर भारतीय हॉकी टीम पर भी पड़ा. पंजाब के कई बेहतरीन खिलाड़ी पाकिस्तान चले गए. इनमें नियाज खान, शाह रुख मोहम्मद, अजीज मलिक और अली शाह दारा जैसे नाम शामिल थे. इसके बावजूद भारतीय टीम ने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी. तत्कालीन इंडियन हॉकी फेडरेशन के प्रमुख नवल टाटा ने खिलाड़ियों के लिए मुंबई में कैंप और अभ्यास मैच आयोजित करवाए. टीम को बेहतर तैयारी का समय मिले, इसके लिए खिलाड़ियों को जहाज की जगह हवाई यात्रा से लंदन भेजा गया. कप्तान किशन लाल के नेतृत्व वाली टीम में केडी सिंह बाबू, लेस्ली क्लॉडियस, केशव दत्त, रणधीर सिंह जेंटल और गोलकीपर आर. फ्रांसिस जैसे खिलाड़ी शामिल थे.

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फिर 8 साल बाद 12 अगस्त को ही आया गोल्ड

12 अगस्त की तारीख ने भारतीय हॉकी को एक और यादगार पल दिया. 1956 मेलबर्न ओलंपिक में भारतीय टीम ने लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में कदम रखा. इस बार फाइनल में सामने पाकिस्तान था. मुकाबला बेहद कड़ा रहा, लेकिन 38वें मिनट में फुलबैक रणधीर सिंह जेंटल ने गोल कर भारत को बढ़त दिलाई. यही गोल निर्णायक साबित हुआ और भारत ने पाकिस्तान को हराकर लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण अपने नाम कर लिया.

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लेखक के बारे में

By अभिजीत कुमार

अभिजीत कुमार पत्रकारिता जगत में दो वर्षों का अनुभव रखने वाले युवा पत्रकार हैं. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में कार्य किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के संपादन, लेखन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

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