Valinath Mahadev Temple: सोमनाथ के बाद गुजरात के सबसे बड़े शिवधाम का 900 साल पूराना इतिहास, जानें कैसे मिले थे महादेव

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Valinath Mahadev Temple

सोमनाथ के बाद गुजरात के दूसरे सबसे बड़े शिवधाम का 900 साल पूराना इतिहास

Valinath Mahadev Temple: वालीनाथ धाम जिस शिवलिंग को स्थापित किया गया है, उस शिवलिंग के दर्शन मात्र से महादेव के भक्तों को 12 ज्योर्तिलिंग का आशीर्वाद मिलता है. पौराणिक मान्यता है कि खुद भगवान कृष्ण ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी.

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Valinath Mahadev Temple: अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और कल्कि धाम मंदिर के शिलान्यास के बाद पीएम मोदी ने गुजरात के मेहसाणा में वलीनाथ धाम मंदिर का उद्घाटन किया. वालीनाथ महादेव के भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा गुरुपुष्प अमृत सिद्धि योग में किया गया. कहा जा रहा है कि वालीनाथ धाम जिस शिवलिंग को स्थापित किया गया है, उस शिवलिंग के दर्शन मात्र से महादेव के भक्तों को 12 ज्योर्तिलिंग का आशीर्वाद मिलेगा. वालीनाथ महादेव मंदिर का निर्माण पुराने मंदिर के स्थान पर किया गया है, इस मंदिर की खास विशेषता है कि पूरे देश के शिव मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन शिवलिंग में होते हैं, लेकिन यहां पर उनका स्वंयमुखा स्टैच्यू भी है. पौराणिक मान्यता है कि इस स्थान पर महाभारत काल से भगवान शिव की पूजा हो रही है और खुद भगवान कृष्ण ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी.

900 साल पुराना इतिहास
तरभ गांव में स्थित वालीनाथ महादेव मंदिर रबारी समुदाय सहित अन्य समुदायों के लिए भी आस्था का केंद्र है. वालीनाथ महादेव मंदिर का इतिहास 900 साल पुराना है. बताया जाता है कि इस शिव भूमि पर रबारी जाति के विरमगिरि बापू का आगमन हुआ था. भक्त तरभोवन रबारी के आग्रह के बाद विरमगिरि बापू वालीनाथ धाम पहुंचे थे. विरमगिरि बापू को जमीन में दबी भगवान वालीनाथ की मूर्ति व धूणी के दर्शन हुए थे. उसके बाद जमीन में दबी भगवान वालीनाथ की मूर्ति को बाहर निकालकर प्रतिष्ठा की गई और एक वृक्ष के नीचे अखंड धूप जलाई गई. एक और दूसरी मान्यता यह भी है कि वीरमगिरिजी के स्वप्न आने के बाद खुदाई की थी और उसमें वालीनाथ महादेव की मूर्ति निकली थी. इस मूर्ति की आज भी यहां पर पूजा की जाती है.

अब तक हुए 14 महंत
रबारी समुदाय समेत छत्तीस जातियां परंपरा से इस स्थान को गुरुगादी मानती हैं. श्री वालीनाथ महादेव मंदिर रबारी समुदाय सहित अन्य समुदायों के लिए अगाध आस्था का केंद्र है. धार्मिक मान्यता है कि 900 वर्ष पूर्व वलीनाथ अखाड़े में प्रथम गुरुगादी पति वीरमगिरि बापू द्वारा मंदिर के निर्माण के बाद श्री वलीनाथजी के स्थान पर महंत-आचार्य परंपरा शुरू हुई. अब तक 14 महंतों ने वलीनाथ महादेव धाम की गद्दी संभाली है, वर्तमान में वलीनाथ मंदिर की सेवा पूजा सहित परंपरा श्री जयरामगिरि बापू रबारी गद्दी पर विराजमान हैं.

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जानें क्या है मंदिर की खासियत

  • वालीनाथ महादेव मंदिर उंझा-विसनगर रोड पर आने वाले तरभ गांव में स्थित है.
  • वालीनाथ महादेव मंदिर का निर्माण 1.45 लाख घन फीट क्षेत्र में किया गया है.
  • इस मंदिर का निर्माण प्राचीन नागर शैली में किया गया है.
  • वालीनाथ महादेव मंदिर का निर्माण बंसीपहाड़पुर के पत्थरों से किया गया है.
  • इस मंदिर की ऊंचाई करीब 101 फीट, लंबाई 265 फीट और चौड़ाई 165 फीट है.
  • वालीनाथ महादेव मंदिर 68 स्तंभों से सुसज्जित है.
  • सोमनाथ मंदिर के बाद गुजरात में दूसरा सबसे बड़ा शिवधाम है.
  • वालीनाथ महादेव मंदिर का निर्माण 14 साल में हुआ है.

इसलिए नाम पड़ा वालीनाथ
दंतकथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रासलीला कर रहे थे, उस समय गोपियों के रूप में भगवान शिव भी वहां पहुंचकर रास करने लगे. भगवान श्रीकृष्ण ने उनके नाक या कानों में पहनी वाली (बाली) के स्वरूप के कारण पहचान लिया गया था, इसलिए भगवान शिव को वालीनाथ के नाम से जाना जाता है.

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राधेश्याम कुशवाहा

लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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