Pradosh Vrat 2026: माघ प्रदोष व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन का महत्व

Pradosh Vrat 2026: माघ कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत बेहद खास है. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद के समय को कहा जाता है, इसी समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.

By Radheshyam Kushwaha | January 15, 2026 12:14 PM

Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का अपना एक विशेष और आध्यात्मिक महत्व है. यह व्रत देवों के देव महादेव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है, जिसमें शिव भक्ति का विशेष फल मिलता है. माघ मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत श्रद्धालुओं के लिए खास बन गया है. इस बार भक्तों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदोष व्रत 15 जनवरी को रखा जाए या 16 जनवरी को. तिथि को लेकर बनी यह उलझन लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रही है और सही व्रत दिन जानने की उत्सुकता भी हैं. आइए जानते हैं पिछले एक दशक से भी अधिक समय से कार्यरत ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: से सही तिथि और शुभ मुहूर्त, पूजा विधि के साथ संपूर्ण जानकारी

Pradosh Vrat 2026 Date: प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त कब है?

माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 जनवरी की रात 08 बजकर 10 मिनट पर
माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी का समाप्ति 16 जनवरी की रात 10 बजकर 10 मिनट पर
प्रदोष व्रत 16 जनवरी दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.
प्रदोष व्रत की पूजा 16 जनवरी दिन शुक्रवार की रात 8 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 20 मिनट तक

पटना से: 16 जनवरी 2026 दिन-शाम शुक्रवार का चौघड़िया

चर – सामान्य 06:37 ए एम से 07:58 ए एम
लाभ – उन्नति 07:58 ए एम से 09:18 ए एम
अमृत – सर्वोत्तम 09:18 ए एम से 10:39 ए एम
काल – हानि 10:39 ए एम से 11:59 ए एम
शुभ – उत्तम 11:59 ए एम से 01:20 पी एम
रोग – अमंगल 01:20 पी एम से 02:40 पी एम
उद्वेग – अशुभ 02:40 पी एम से 04:01 पी एम
चर – सामान्य 04:01 पी एम से 05:21 पी एम

रोग – अमंगल 05:21 पी एम से 07:01 पी एम
काल – हानि 07:01 पी एम से 08:40 पी एम
लाभ – उन्नति 08:40 पी एम से 10:20 पी एम

शुक्र प्रदोष व्रत विशेष

माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि पर शुक्रवार का संयोग पड़ने के कारण इस दिन को शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. प्रदोष व्रत के दिन सूर्यास्त होने से एक घंटे पहले ईशान कोण में किसी एकांत स्थान पर बैठकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें, इसके साथ साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना चाहिए.

Pradosh Vrat Puja Vidhi: प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • घर के मंदिर या शिवालय को साफ करें.
  • हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें
  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी अर्पित करें
  • बेलपत्र, धतूरा, भस्म, सफेद फूल और धूप-दीप जलाएं.

प्रदोष काल में शिव पूजन

  • प्रदोष काल में शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें.
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और भस्म अर्पित करें.
  • भगवान शिव के समक्ष घी और तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें.
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
  • प्रदोष व्रत कथा, शिव चालीसा या प्रदोष स्तोत्र का पाठ करें.

माता पार्वती की पूजा

  • शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करें.
  • माता पार्वती जी को सुहाग की वस्तुएं और फूल अर्पित करें.
  • खीर, सफेद मिठाई या फल का भोग लगाएं.
  • पूजा के अंत में शिव-पार्वती की आरती करें.
  • घर में सुख-समृद्धि और प्रेम शांति की कामना करें.
  • पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें.

प्रदोष व्रत में विशेष सावधानियां

  • प्रदोष काल से पहले या बाद में पूजा करने से बचें
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें
  • तामसिक भोजन और शराब का सेवन न करें
  • भूलकर भी किसी का अपमान न करें.

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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