Chandra Grahan 2026: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा को नग्न आंखों से देखना सुरक्षित है या नहीं. वैज्ञानिकों के अनुसार, इसे नग्न आंखों से बिना किसी विशेष चश्मे के देखना बिल्कुल सुरक्षित है.
वैज्ञानिकों की राय
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण को खुले आसमान में नग्न आंखों से देखना सुरक्षित होता है. चंद्रमा की अपनी कोई रोशनी नहीं होती, बल्कि वह सूर्य की रोशनी को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करता है. ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया पड़ने से यह रोशनी और भी कम हो जाती है, जो आंखों के लिए बिल्कुल भी हानिकारक नहीं होती. इससे आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.
चंद्र ग्रहण क्या होता है ?
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है. यह खगोलीय घटना केवल पूर्णिमा तिथि के दिन ही होती है. ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है.
चंद्र ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?
चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं —
1. पूर्ण चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की गहरी छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है. इस स्थिति में सूर्य का सीधा प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता और चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देने लगता है. इसी कारण इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है. यह चंद्र ग्रहण का सबसे दुर्लभ रूप माना जाता है और इसे लोग साफ तौर पर देख सकते हैं.
2. आंशिक चंद्र ग्रहण
आंशिक चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के केवल कुछ हिस्से पर पड़ती है. इस दौरान चंद्रमा का एक भाग काला या धुंधला दिखाई देता है, जबकि बाकी हिस्सा सामान्य रूप से चमकता रहता है.
3. उपच्छाया चंद्र ग्रहण
उपच्छाया चंद्र ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया से होकर गुजरता है. इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह अंधकारमय नहीं होता, बल्कि उसकी चमक थोड़ी कम या धुंधली दिखाई देती है. कई बार यह बदलाव इतना हल्का होता है कि सामान्य लोगों के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है.
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