Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर मौन व्रत क्यों है जरूरी? जानिए पौराणिक कारण

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या 2026 पर मौन व्रत का विशेष महत्व है. जानिए मनु महाराज से जुड़ी पौराणिक कथा, मौन व्रत के लाभ और धार्मिक मान्यताएं.

By Shaurya Punj | January 17, 2026 5:45 AM

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म का बहुत पवित्र दिन माना जाता है. यह माघ महीने की अमावस्या को आती है. इस दिन लोग पवित्र नदी में स्नान करते हैं, दान देते हैं और मौन व्रत रखते हैं. माना जाता है कि इस दिन मौन रहना सबसे बड़ा तप होता है. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि मौनी अमावस्या पर मौन व्रत क्यों रखा जाता है और इसके पीछे क्या मान्यताएं हैं.

मौनी अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी की देर रात 12 बजकर 03 मिनट से होगी. यह तिथि 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट तक रहेगी. इसी कारण कुछ लोग 19 जनवरी को मौनी अमावस्या मान रहे हैं, क्योंकि उस दिन भी अमावस्या तिथि चल रही होगी.

लेकिन हिंदू धर्म में पर्व और व्रत उदयातिथि के अनुसार मनाए जाते हैं. उदयातिथि का मतलब होता है जिस तिथि में सूर्योदय होता है. 18 जनवरी को सूर्योदय अमावस्या तिथि में ही होगा, इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार को ही मनाई जाएगी.

मनु महाराज से जुड़ी मान्यता

पुराणों के अनुसार मौनी अमावस्या का संबंध मनु महाराज से है. मनु को मानव जाति का पहला पुरुष माना जाता है. कहा जाता है कि मनु महाराज ने इसी दिन मौन रहकर भगवान की तपस्या की थी और अपने मन को शुद्ध किया था. उन्हीं के नाम पर इस दिन को मौनी अमावस्या कहा गया. इस दिन लोग बोलने से बचकर अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हैं.

मौन क्यों जरूरी माना गया

धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इंसान से सबसे ज्यादा गलती उसकी जुबान से होती है. गुस्से में बोले गए शब्द, झूठ और कड़वी बातें पुण्य को कम कर देती हैं. मौनी अमावस्या पर मौन रहने से ऐसे पापों से बचा जा सकता है. जब व्यक्ति चुप रहता है तो उसका मन शांत होता है और वह गलत बोलने से बच जाता है.

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देवताओं और पितरों की कृपा

मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन देवता और पूर्वज धरती पर आते हैं. इस दिन मौन रहकर किया गया स्नान, दान और पूजा उन्हें जल्दी प्रसन्न करती है. इससे पितरों की कृपा मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. पितृ दोष से परेशान लोगों के लिए यह दिन खास माना जाता है.

मन को शांत करने का अवसर

मौन व्रत सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी लाभदायक होता है. जब हम बोलते नहीं हैं तो मन अपने आप शांत होने लगता है. विचार साफ होते हैं और आत्मचिंतन का मौका मिलता है. पुराने समय के ऋषि-मुनि भी मौन को बहुत बड़ी साधना मानते थे.

स्नान और दान का फल

मौनी अमावस्या के दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है. मौन व्रत के साथ किया गया दान कई गुना फल देता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया व्रत पुराने पापों को भी खत्म कर देता है.

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा हमें शांति, संयम और आत्मचिंतन का संदेश देती है. यह दिन अपने मन को साफ करने और अच्छे कर्म करने का अवसर है.