Zohran Mamdani : कौन हैं जोहरान ममदानी जो बनें न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर, जानिए भारत कनेक्शन

Zohran Mamdani : जोहरान ममदानी पहले अमेरिकी मुस्लिम हैं, जिन्हें न्यूयॉर्क का मेयर बनने का मौका मिला है. ममदानी ने मेयर का चुनाव जीत लिया है , वे आम चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार थे. जोहरान ममदानी में आम भारतीय की रुचि इसलिए है क्योंकि वे भारत की प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक मीरा नायर के बेटे हैं. मीरा नायर ने सलाम बॉम्बे और मानसून वेडिंग जैसी फिल्में बनाई हैं.

Zohran Mamdani : जोहरान ममदानी यह नाम आज सुबह से ही गूगल ट्रेंड में दिख रहा है. इसकी वजह यह है कि जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव जीत गए हैं और उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी एंड्रयू कुओमो को पराजित किया. जोहरान ममदानी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं और वे न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बने हैं. प्राथमिक चुनाव में जीत के बाद जोहरान ममदानी ने अपने भाषण में कहा था कि मैं एक ऐसे शहर के लिए लड़ूंगा जो आपके लिए काम करे. जो आपके लिए सुरक्षित और आपके अधिकारों की रक्षा कर सके.

जोहरान ममदानी को क्यों किया जा रहा है पसंद

मीरा नायर के साथ जोहरान ममदानी

न्यूयॉर्क शहर के मेयर के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बनने के बाद से ही जोहरान ममदानी काफी खुश थे. उन्होंने कहा है कि यह मेरे लिए एक सम्मान की तरह है. 33 वर्षीय जोहरान को प्राथमिक चुनाव में 50 प्रतिशत लोगों का वोट मिला था जबकि उनके प्रतिद्वंदी 40 प्रतिशत वोट पर सिमट गए थे. जोहरान मदानी न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा में एक प्रतिनिधि हैं और खुद को प्रगतिशील और कामकाजी वर्ग की पसंद बताते हैं. जोहरान ममदानी युगांडा के शिक्षाविद महमूद ममदानी और भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे हैं. जोहरान का जन्म युगांडा के कंपाला में हुआ और लगभग 7 साल की उम्र में वे अपने माता-पिता के साथ न्यूयॉर्क आ गए. 2018 में, उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिली है. जोहरान ने अमेरिका के बोडोइन कॉलेज से अफ्रीकाना अध्ययन में स्नातक की डिग्री ली है. राजनीति में आने से पहले वे कंसल्टेंट के रूप में काम करते थे.

जोहरान ममदानी की जीत का क्या पड़ेगा असर

जोहरान ममदानी की जीत अमेरिका में एक नई राजनीतिक शुरुआत का संकेत देता है. जोहरान ममदानी डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर एक नई तरह की सोच रखते हैं. वे यह कहते हैं कि न्यूनतम वेतन, अफोर्डेबल हाउसिंग और पुलिस सुधार जैसे नियम बनाए जाएं. यह एक नई सोच की ओर इशारा करता है. जोहरान की जीत यह साबित करती है कि न्यूयॉर्क जैसे शहर में लोग प्रगतिशील एजेंडा के बारे में सोच रहे हैं. जोहरान ममदानी एक मुस्लिम हैं, जिनकी जीत यह साबित करती है कि अमेरिका में सभी वर्गों के लिए अभी भी अवसर बचा हुआ है और वहां का समाज सबको स्वीकार करता है. प्रवासी भारतीयों के लिए भी यह जीत काफी मायने रखती है और यह साबित करती है कि अमेरिका के सबसे बड़े शहर में न्यूयॉर्क में नई राजनीति की दस्तक हो चुकी है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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