एपस्टीन फाइल्स पर हंगामा है क्यों मचा? दलाईलामा को क्यों देनी पड़ी सफाई

Epstein Files : जेफ्री एपस्टीन एक ऐसा व्यक्ति जिसने नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया. वह नाबालिग लड़कियों की ट्रैफिकिंग भी करता था. 2008 में उसकी कारगुजारियों की जानकारी सामने आई, लेकिन उसके तार रसूख लोगों से जुड़े थे, इस वजह से उसे बहुत मामूली सजा हुई. 2019 में उसकी मौत हो गई और अब एक बार फिर  जेफ्री एपस्टीन के अपराध और उसे जुड़े लोग चर्चा में हैं, क्योंकि उससे जुड़े ईमेल में कई अहम जानकारियां हैं. इन जानकारियों के सार्वजनिक होने पर कई लोग सवालों के घेरे में हैं.

Epstein Files : एपस्टीन फाइल्स के दस्तावेज जारी तो अमेरिका में हुए हैं, लेकिन इसकी आंच अमेरिका से निकलकर यूरोप और एशिया के देशों तक पहुंच गई है. जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिसपर यह आरोप है कि वह नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करता था. उसका नाम लड़कियों की ट्रैफिकिंग से भी जुड़ा. जेफ्री एपस्टीन के इस कुकृत्य में जो लोग साथी बने वे  सेलिब्रिटिज, अमीर लोगों और राजनेता थे.

अमेरिकी संसद द्वारा कानून बनाएं जाने के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने 19 दिसंबर को जेफ्री एपस्टीन से जुड़े हजारों दस्तावेज सार्वजनिक किये, तो हंगामा मच गया. अब ऐसी सूचना आ रही है कि एपस्टीन की फाइल में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलाम का नाम आ रहा है. हालांकि दलाईलामा के कार्यालय की ओर से यह बयान जारी किया गया है कि दलाईलामा की जेफ्री एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं हुई थी और ना ही उनका जेफ्री एपस्टीन से किसी तरह का कोई संबंध था. जेफ्री एपस्टीन और उसके फाइल की इन दिनों चर्चा तो बहुत हो रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फाइल में क्या है? 

एपस्टीन फाइल्स में क्या है?

एपस्टीन फाइल्स में कई दस्तावेज, ईमेल, तस्वीर और वीडियो हैं. इन तमाम चीजों को साथ में एपस्टीन फाइल्स का नाम दिया गया है. इन दस्तावेजों के जरिए जेफ्री एपस्टीन के संबंध किन लोगों के साथ थे, इसका पता चलता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन दस्तावेजों में जिन लोगों का नाम आता है, वो इस बात का प्रमाण नहीं है कि संबंधित व्यक्ति किसी तरह के अपराध में शामिल था.

दरअसल ये तमाम चीजें जेफ्री एपस्टीन के अपराधों से जुड़ी जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं. यह बात पूरी तरह से स्पष्ट होनी चाहिए कि इन फाइल्स में जिनका नाम आता है, उन्हें अपराधी या जेफ्री एपस्टीन का साथी करार नहीं दिया जा सकता है. इस फाइल में कई नाम संदर्भ, ईमेल बातचीत, कैलेंडर एंट्री या दूसरे अप्रत्यक्ष तरीके से आते हैं, जो अपराधी होने का प्रमाण नहीं है.

एपस्टीन फाइल्स पर हंगामा है क्यों मचा?

जेफ्री एपस्टीन का नाम बहुत ही घृणित अपराध से जुड़ा है. उसने किशोरियों का यौन शोषण किया और उनके ट्रैफिकिंग से भी जुड़ा रहा. 2019 में उसकी मौत हुई थी. उसने जो अपराध किए थे उनकी जांच के क्रम में कई राजनेता और सेलिब्रिटीज के नाम सामने आए हैं, जिनसे उसके संबंध बताये जा रहे हैं. इनमें यूरोप के बड़े नेता और राजकुमार भी शामिल हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन का नाम भी इस फाइल में सामने आया है. इसी वजह से पूरी दुनिया में इन फाइल्स को लेकर हंगामा मचा हुआ है.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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