पिचके गाल, शरीर पर सिर्फ चमड़ी वायरल हुई सुनीता विलियम्स की ये तस्वीर, दोगुना खा रहीं खाना NASA चिंतित

Sunita Williams Stuck In Space : भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसे नासा ने जारी किया है और उनकी गिरती सेहत को लेकर चिंता जताई है. इस तस्वीर में सुनीता विलिम्स के गाल धंसे हुए दिख रहे हैं और शरीर पर मांस काफी कम नजर आ रहा है. उनकी तस्वीर देखकर डाॅक्टर चिंतित हैं. न्यूयार्क टाइम्स ने नासा के सूत्रों के अनुसार खबर छापी है कि महिला अंतरिक्ष यात्रियों का वजन पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों की अपेक्षा ज्यादा कम होता है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं भी अधिक होती हैं.

Sunita Williams Stuck In Space : अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की वायरल तस्वीर को देखकर आप एकबार उन्हें पहचान नहीं पाएंगे. तस्वीर देखकर लग रहा है कि उनके शरीर में चमड़ी और हड्डियां भर शेष हैं. वे काफी कमजोर हो गई हैं और उनकी सेहत पर यह कहा जाता सकता है कि उन्हें किसी भी तरह अपना वजन स्थिर रखने की कोशिश करनी होगी, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ परेशानी यह है कि वे जितनी कैलोरी भोजन के साथ लेते हैं, उससे ज्यादा कैलोरी उनकी बर्न हो जाती है. इस वजह से उनके सामने वजन को सामान्य बनाने की चुनौती होती है.

क्या सुनीता विलियम्स की जान को है खतरा?

सुनीता विलियम्स की जो हालिया तस्वीर है, उसे देखने के बाद नासा के डाॅक्टर उनका वजन बढ़ाने में पूरी मदद कर रहे हैं. सुनीता जून महीने में अंतरिक्ष गई थीं और अब नवंबर का महीना चल रहा है. उन्हें वहां रहते हुए 155 दिन से ज्यादा हो चुके हैं. न्यूयार्क टाइम्स ने नासा के अधिकारियों से बातचीत के बाद जो खबर प्रकाशित की है उसमें यह बताया गया है कि उन्हें वजन बढ़ाने और स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए सलाह दी जा रही है. जब सिंतबर महीने में उनकी तस्वीर आई थी नासा तब से उनके गिरते वजन को कम करने की कोशिश कर रहा है. नासा के अधिकारियों का कहना है कि सुनीता विलियम्स के घटते वजन से वे चिंतित हैं, लेकिन इसमें उनकी जान को खतरा नहीं है और उम्मीद की जा रही है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा. नासा के डाॅक्टर्स ने उन्हें प्रतिदिन 5,000 कैलोरी खाने की सलाह दी है.


महिला अंतरिक्ष यात्री को क्यों होती है ज्यादा परेशानी

नासा का कहना है कि एक अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में अपना वजन मैंटेन करने के लिए पृथ्वी पर रहने वाले लोगों की अपेक्षा दोगुनी कैलोरी खानी पड़ती है. सुनीता ने जब जून में मिशन की शुरुआत की थी, तो उनका वजन 140 पाउंड यानी 63 किलो से कुछ ज्यादा था. अंतरिक्ष में जाने से मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता और शरीर को मिलने वाली ऊर्जा का नुकसान होता है. अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण कमजोर होता है इसलिए शरीर के ऊपरी हिस्से में लिक्विड यानी तरल पदार्थ जमा होने लगता है. गुरुत्वाकर्षण कम होने की वजह से हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं और ब्लड प्रेशर पर भी काफी फर्क पड़ता है. इन वजहों से शरीर को अपना वजन सामान्य रखने के लिए अंतरिक्ष में ज्यादा कैलोरी की जरूरत होती है. फिजियोलॉजी पर एक केंद्रित एक विज्ञान के जर्नल में यह बात प्रकाशित हुई है कि महिला अंतरिक्ष यात्रियों का वजन पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा कम होता है क्योंकि जितने कैलोरी की जरूरत उन्हें अंतरिक्ष में होती है वे उतना कंज्यूम नहीं कर पाती हैं. सुनीता विलियम्स के साथ भी यही हो रहा है उन्हें जितनी कैलोरी चाहिए वे उतना खा नहीं पा रही हैं, जिसकी वजह से उनकी मांसपेशियां तेजी से कम हो रही हैं और वजन गिरता जा रहा है. नासा के कर्मचारी का कहना है कि सुनीता को प्रतिदिन 3,500 से 4,000 कैलोरी लेनी होगी तभी उनका वजन ठीक हो पाएगा, यही वजह है कि उन्हें 5,000 कैलोरी खाने की सलाह दी गई है.


क्या खा रही हैं सुनीता विलियम्स

अंतरिक्ष में यात्री अधिकतर फ्रीज ड्राई फूड का इस्तेमाल करते हैं. वे डिब्बाबंद मछली और चिकन का भी प्रयोग करते हैं जो थर्मो स्टेबलाइज्ड होता है. थर्मो स्टेबलाइज्ड फूड उसे कहते हैं, जिसे गर्म करके हानिकारक एंजाइम और सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के बाद पैक किया जाता है. अंतरिक्ष यात्री नट्स, ग्रेनुला बार और कुकीज भी खाते हैं. वे मसाले और मिठाइयां भी खाते हैं. सुनीता विलियम्स की जो तस्वीर सामने आई है उसमें वे पिज्जा खाती नजर आ रही और अन्य मसाले भी वहां मौजूद हैं, जिनका उपयोग वो करती हैं. अंतरिक्ष यात्रियों को दिन में तीन बार खाना खाने की जरूत होती है ताकि शरीर में ऊर्जा बना रहे. उन्हें व्यायाम भी करना होता है जिसकी अवधि दो घंटे तक की होती है.

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लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से क्या होता है असर

सुनीता विलियम्स जून के महीने में अंतरिक्ष गई थीं और अब उनको गए पांच महीने से अधिक का समय हो गया है. नासा ने बताया कि जिस ड्रैगन क्रू कैप्सूल से उन्हें वापस आना है वो फरवरी से पहले उन्हें सुरक्षित नहीं ला सकता है. यानी अभी दो से तीन महीने सुनीता विलियम्स और उसके साथी बैरी को वहीं रहना है. लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा, जिसमें वजन कम होना, मांसपेशियों का टूटना, हड्डी कमजोर होना, आंख पर असर होना और किडनी स्टोन जैसी बीमारी का होना संभव है. नासा के अधिकारी भले ही अधिकारिक तौर पर यह कह रहे हैं कि उनकी जान को कोई खतरा नहीं है, लेकिन डेली मेल के अनुसार वे काफी प्रयास कर रहे हैं ताकि सुनीता का स्वास्थ्य ना गिरे और वजन स्थिर रहे.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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