अंतरिक्ष से आई बुरी खबर, सुनीता विलियम्स को वापसी के लिए करना होगा और इंतजार, ये है वजह

Sunita Williams : भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को धरती पर लौटने के लिए और इंतजार करना होगा. नासा की ओर से जानकारी दी गई है कि उन्हें वापस लाने के लिए जो कैप्सूल तैयार किया रहा है उसमें अभी और समय लगेगा.

Sunita Williams NASA astronauts delayed again:अंतरिक्ष से भारतीयों के लिए बुरी खबर आ रही है, भारतवंशी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बैरी विल्मोर की वापसी में और देरी हो सकती है. इस संबंध में नासा की ओर से जानकारी दी गई है कि उनकी वापसी के लिए स्पेस–एक्स जो कैप्सूल तैयार कर रहा है उसे बनाने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा. संभवत: सुनीता विलियम्स और उनके साथी को मार्च के अंत तक अंतरिक्ष में ही रहना पड़े.

सुनीता की वापसी में क्यों हो रही है देरी

नासा के अधिकारियों ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार सुनीता विलियम्स को अंतरिक्ष से वापस लाने के लिए स्पेसएक्स जो कैप्सूल तैयार कर रहा है वह मार्च के अंतिम सप्ताह तक ही तैयार हो पाएगा. इस स्थिति में सुनीता विलियम्स की वापसी अप्रैल के पहले सप्ताह में ही संभव है. पहले उन्हें फरवरी 2025 तक लौटना था, लेकिन अब यह संभव नजर नहीं आ रहा है. अन्य विकल्पों पर विचार करने के बाद उनके अंतरिक्ष प्रवास को बढ़ाने का फैसला ही सुरक्षित माना गया है.

सुनीता विलियम्स को 10 महीने तक अंतरिक्ष में रहना पड़ेगा

सुनीता अंतरिक्ष में परेशान नहीं है, वे शोध में अपना समय गुजार रही हैं

सुनीता विलियम्स 5 जून 2024 को अपने मिशन पर अंतरिक्ष गई थीं. उनका मिशन एक सप्ताह का था लेकिन उन्हें छह माह से अधिक का वक्त हो गया है. जैसी सूचना है उन्हें अभी तीन-चार महीने और वहां रहने होंगे, यानी कुल 10 महीने का समय सुनीता को अंतरिक्ष में गुजारना है. नासा की नवीनतम सूचना से सुनीता विलियम्स की वापसी का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लगी है और वे सुनीता विलियम्स के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं.

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अंतरिक्ष में सलाद उगा रही हैं सुनीता विलियम्स

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की धरती पर वापसी तो नहीं हो पा रही है, लेकिन अपने अनुभव की वजह से सुनीता वहां परेशान नहीं हैं. वे फिलहाल क्रिसमस की तैयारी में व्यस्त हैं. नासा ने उनकी एक तस्वीर जारी की है, जिसमें वे सांता की टोपी पहने हुए हैं और कोलंबस प्रयोगशाला मॉड्यूल के अंदर हैम रेडियो पर बोलते हुए काफी खुश नजर आ रही हैं. उनके साथ विल्मोर भी साथ हैं. संभावना है कि वे क्रिसमस के मौके पर वीडियो काॅल के जरिए अपने परिजनों से मिलेंगे. सुनीता और बैरी फिलहाल अपने शोध में व्यस्त हैं और वे कई प्रयोग कर डेटा जमा कर रहे हैं, जिनका धरती पर विश्लेषण किया जाएगा. सुनीता ने अंतरिक्ष में अपना बर्थडे मनाया और दोस्तों से बात भी की. वे वहां अंतरिक्ष स्टेशन में सलाद उगा रही हैं और उसके पत्तों की छंटाई भी कर रही हैं.

वजन काफी घटा है, लेकिन जीवन पर नहीं है खतरा

सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में ले रही हैं सही डाइट

सुनीता विलियम्स की एक तस्वीर नवंबर महीने में वायरल हो गई थी जिसमें उनका वजन काफी कम नजर आ रहा था और वे काफी कमजोर और बीमार लग रही थी. लेकिन नासा के अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि इससे उनके जीवन पर कोई खतरा नहीं है. अंतरिक्ष में यात्रियों को जितने भोजन की आवश्यकता होती है, सुनीता उतना खा नहीं पा रही हैं जिसकी वजह से उनका वजन घट गया है. लेकिन सुनीता स्वस्थ हैं और अपने मिशन की सफलता को लेकर आश्वस्त भी हैं. उन्हें इस बात का गर्व है कि वे इतने लंबे समय तक अंतरिक्ष में डटी हुई हैं.

सुनीता विलियम्स की कोई संतान नहीं है

सुनीता विलियम्स एक भारतीय मूल की अमेरिकन हैं. उनके पिता का नाम दीपक पांड्‌या है. सुनीता की शादी माइकल जे विलियम्स से हुई है. वे लगभग 20 सालों से एक साथ हैं. इनका कोई बच्चा नहीं है, हालांकि सुनीता विलियम्स यह चाहती हैं कि वे एक गुजराती लड़की को गोद लें.

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FAQ सुनीता विलियम्स को अंतरिक्ष में कितना समय हो गया?

सुनीता विलियम्स को छह माह से अधिक का समय हो गया है. वे 5 जून 2024 को अंतरिक्ष गई थी और अप्रैल 2025 में वापसी की संभावना है.

अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स अभी क्या कर रही हैं?

अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स अभी शोध कर रही हैं .

सुनीता विलियम्स के कितने बच्चे हैं?

सुनीता विलियम्स का कोई बच्चा नहीं है. वे बेटी को गोद लेना चाहती हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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