भारत ही नहीं इन देशों में भी महिलाएं असुरक्षित, US में हर दूसरे मिनट 1 महिला दरिंदगी की शिकार

Kolkata Doctor Murder Case : कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला डाॅक्टर के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा देश में एक बार फिर चर्चा में है. भारत में हर 15 मिनट में एक महिला के साथ रेप हो रहा है. महिलाएं ना तो घर ना बाहर सुरक्षित हैं ना ही घर के अंदर. यह स्थिति सिर्फ अपने देश में ही नहीं है, बल्कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी महिलाएं बलात्कार की शिकार होती हैं. अफ्रीकी देशों में महिला सुरक्षा का मुद्दा बहुत बड़ा है.

Kolkata Doctor Murder Case :  कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नौ अगस्त की रात को जो कुछ हुआ और जिस तरह एक डाॅक्टर की बलात्कार के बाद हत्या हुई उसके बाद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है और प्रदर्शन का दौर जारी है. क्रिकेटर सौरव गांगुली जो खुद भी एक बेटी के पिता हैं, आज के प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं. हमारे देश में हर 15 मिनट में एक बलात्कार की घटना दर्ज हो जाती है, वहीं एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन बलात्कार के 86 मामले दर्ज होते हैं और साल भर में कुल 33 हजार रेप दर्ज हुए थे. देश में दर्ज नहीं होने वाले मामले भी हजारों में हैं. यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर महिलाएं क्या करें और कहां जाएं, उनके साथ घर पर बलात्कार हो रहे हैं, कार्यस्थल पर दुष्कर्म हो रहे हैं और राह चलते या सुनसान जगह पर तो वो कभी भी सुरक्षित नहीं थी. 

आंकड़ों पर अगर गौर करें तो हमारे देश में बलात्कार की जो घटनाएं होती हैं, उनमें से 50 प्रतिशत मामलों में आरोपी उनके पहचान वाले होते हैं. यानी सुरक्षा का मामला बहुत गंभीर है, विश्वास में लेकर या फिर यूं कहें कि जिनपर महिलाएं विश्वास करती हैं, वे भी उन्हें धोखा दे देते हैं. यह स्थिति सिर्फ भारतीय समाज में नहीं हैं, भारत के अलावा अन्य विकसित देशों में भी महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है. अमेरिका जैसे विकसित देश में भी महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले सामने आते हैं. आइए जानते हैं महिलाओं के लिए कितनी सुरक्षित है यह धरती…

अमेरिका में हर दूसरे मिनट में एक बलात्कार

अमेरिकी महिलाओं की अगर बात करें तो वहां हर राज्य में बलात्कार की घटनाओं में विभिन्नता है, लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए तो वहां हर दूसरे मिनट में एक महिला बलात्कार की शिकार हो जाती हैं. वहां 16-19 वर्ष की युवतियां बलात्कार की शिकार ज्यादा होती हैं. अमेरिका में वर्ष 2021 में 140,776 बलात्कार की घटनाएं हुईं. वहीं यूके में यह आंकड़ा 35 हजार के करीब था. जिन देशों में महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएं होती हैं उनमें अफ्रीकी देश शीर्ष पर हैं.

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इन देशों में महिलाएं हैं सबसे अधिक पीड़ित

1. बोत्सवाना एक अफ्रीकी देश है, जहां विश्व में सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं सामने आती हैं. datapandas.org की रिपोर्ट के अनुसार वहां हर एक लाख में 92.93 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है. बोत्सवाना की 70 महिलाएं रेप या फिर किसी न किसी तरह की यौन हिंसा की शिकार बनती हैं.

2. लेसोथो भी एक दक्षिण अफ्रीकी महादेश का देश है, जहां महिला सुरक्षा सवालों के घेरे में है. यहां प्रति एक लाख पर 82.68 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना होती है.

3. दक्षिण अफ्रीका महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थानों में तीसरे नंबर पर है, जहां प्रति एक लाख पर 72.10 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं होती हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों की सूची में एक से दस नंबर तक स्वीडन के अलावा सभी अफ्रीकी देश हैं. इस लिस्ट में भारत 95 नंबर पर है जहां प्रति एक लाख में 1.81 महिला के साथ रेप होता है. 

महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित देश

महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से न्यूजीलैंड, फिनलैंड, नाॅर्वे और आइसलैंड को सबसे बेहतर जगह माना जाता है. इन जगहों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं काफी कम होती हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा का डर नहीं सताता है. न्यूजीलैंड में प्रति एक लाख पर 25. 85, फिनलैंड में प्रति एक लाख पर 15.25 रेप के केस दर्ज होते हैं. स्विटजरलैंड में 7.08 और पोलैंड में 4.09 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं होती हैं.

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FAQ : किस देश में महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा होते हैं रेप?

अफ्रीका के बोत्सवाना में महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा रेप की घटनाएं होती हैं. वहां प्रति एक लाख पर पर 92.93 महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं होती हैं.

किस देश को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है?

फिनलैंड, न्यूजीलैंड, स्विटजरलैंड और आइसलैंड जैसे देशों को महिलाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है.

अमेरिका में महिलाओं के खिलाफ अपराध की क्या है स्थिति?

अमेरिका में हर दूसरे मिनट में एक महिला रेप का शिकार बनती है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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