Gupta Empire Golden Age Of India : क्या आप जानते हैं, वह स्तंभ कहां है, जिसने भारत के कई रहस्य को समेटे रखा?

Gupta Empire Golden Age Of India : विश्व इतिहास में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. यही कारण है कि भारत को जीतने और यहां से धन–संपदा लूटने के लिए ना सिर्फ ईसा पूर्व सिकंदर महान ने भारत का रुख किया, बल्कि बाद के वर्षों में मोहम्मद गोरी, महमूद गजनवी और अंग्रेजों ने भी हमला किया था. भारत की सभ्यता बहुत पुरानी है, लेकिन यहां इतिहास लिखने की परंपरा अपेक्षाकृत कम थी, जिस वजह से हमें इतिहास की जानकारी कम मिलती है. प्राचीन इतिहास में अगर जाएं, तो सम्राट अशोक के बाद गुप्त काल के शासकों ने ही अपनी भावी पीढ़ी के लिए कुछ प्रमाण छोड़े जिनके जरिए उस काल को समझा जा सकता है.

Gupta Empire Golden Age Of India : गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है. यह काल था चौथी शताब्दी से छठी शताब्दी के बीच का जो लगभग 320 से 550 ईस्वी तक माना जाता है. इस दौर में भारतीय सभ्यता ऊंचाई पर थी. राजनीति, कला, संस्कृति, विज्ञान, गणित और स्थापत्य के क्षेत्र में  भारतीय सभ्यता को यूरोप भी टक्कर नहीं दे पा रहा है. इस काल ने हमें आर्यभट्ट का शून्य और कालिदास का अभिज्ञान शकुंतलम्‌ भी दिया है.

गुप्त काल भारतीय इतिहास के लिए इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि इसने हमें कई ऐसे सबूत दिए जिनके आधार पर भारतीय इतिहास को और भी बेहतर ढंग से समझा जा सके. गुप्त काल का एक ऐसा ही शिलालेख आज भी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिसे पहले इलाहाबाद कहा जाता था, वहां मौजूद है. यह शिलालेख गुप्तकाल के महान शासक समुद्रगुप्त के समय का है, जिसमें उस वक्त की राजनीति, भारत की सामाजिक व्यवस्था, कला–साहित्य आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

कहां हैं गुप्तकालीन शिलालेख?

गुप्त कालीन कई शिलालेख बंगाल से काठियावाड़ तक कई इलाकों में मिले हैं. इनकी मदद से गुप्तों के इतिहास की क्रोनोलॉजी को समझना संभव हो पाया. साथ ही हमें उस वक्त की जानकारी भी मिली. गुप्तकालीन शिलालेखों में इलाहाबाद में मौजूद अशोक स्तंभ सबसे प्रमुख सबूत है, जिसपर उस वक्त की तमाम बातें बहुत ही स्पष्टता के साथ लिखी हैं. इस स्तंभ को मौर्य वंश के महान शासक सम्राट अशोक ने स्थापित किया था. इस स्तंभ पर उनके शिलालेख भी मौजूद हैं, बाद में समुद्रगुप्त ने भी इस स्तंभ पर शिलालेख करवाया.

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गुप्तकालीन शिलालेख में क्या बताया गया है?

अशोक स्तंभ पर ऊपर की ओर सम्राट अशोक के शासनकाल की बातें लिखी हुई हैं. उसके बाद इस स्तंभ पर गुप्तकालीन शिलालेख है. जिसमें समुद्रगुप्त के विजय अभियानों, उस वक्त की राजनीति और समाज के बारे में विस्तार से बताया गया है. यह स्तंभ यह बताता है कि गुप्तवंश की स्थापना श्रीगुप्त ने की थी.  हालांकि उसका विस्तार चंद्रगुप्त प्रथम के समय हुआ. चंद्रगुप्त प्रथम समुद्रगुप्त के पिता थे और उन्होंने खुद गद्दी त्यागकर समुद्रगुप्त को सत्ता सौंपी थी. इस शिलालेख में समुद्रगुप्त का स्तुतिगान किया गया है. इसे उनके दरबार में काम करने वाले  हरिषेण ने लिखा है . गुप्त कालीन शिलालेख का महत्व इसलिए बहुत ज्यादा है, क्योंकि यह हमें भारतीय इतिहास को समझने में मदद करता है.  

भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग किसे कहते हैं?

गुप्तका को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है.

गुप्तवंश की स्थापना किसने की थी?

श्रीगुप्त ने गुप्तवंश की स्थापना की थी.

गुप्त साम्राज्य के किस राजा को भारत का नेपोियन कहा जाता है?

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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