सर्वाइकल कैंसर का टीका या महिलाओं के लिए अलग टैक्स स्लैब, निर्मला सीतारमण महिलाओं को क्या दे सकती हैं सौगात

Budget 2025 : नरेंद्र मोदी सरकार 3.0 के पहले बजट में महिलाओं के लिए क्या होगा खास? इस सवाल के जवाब पर सबकी नजरें टिकी हैं. महिलाओं को बेहतर जीवन देने के लिए दृढ़ संकल्पित सरकार सर्वाइकल कैंसर के टीके HPV को इस बजट में लाॅन्च करेगी इसकी पूरी संभावना है, वहीं टैक्स स्लैब अलग किए जाने की भी चर्चा आम है.

Budget 2025 :  नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट आज 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण प्रस्तुत करेंगी. यह बजट कई मायनों में अहम होगा, क्योंकि इस बजट के जरिए मोदी सरकार कई निशाने साधेगी. आर्थिक सर्वेक्षण और बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री ने जिस तरह के बयान दिए हैं, उससे यह स्पष्ट है कि इस बार के बजट में सरकार महिलाओं पर फोकस करेगी.

महिलाओं को खुश करना चाहेगी सरकार

नरेंद्र मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही महिलाओं को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाती रही है. पिछले साल के बजट पर अगर हम गौर करें तो पाएंगे कि सरकार ने जिन लोगों पर केंद्रित बजट पेश किया था उनमें एक महिला भी थी. महिलाओं के अलावा अन्नदाता यानी किसान, युवा और गरीबों पर सरकार का फोकस था. नरेंद्र मोदी सरकार नारी शक्ति और महिला सशक्तीकरण को लेकर काम कर रही है, जिसके अंतर्गत कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं, जिनमें उनके जीवन स्तर को सुधारने और उनके नेतृत्व में विकास की परिकल्पना की गई है. इतना ही नहीं उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की भी कई योजनाएं हैं. इस बार के बजट में महिलाओं को जो सौगात मिल सकती है, उसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण सबकुछ शामिल है.

सर्वाइकल कैंसर के टीके HPV की हो सकती है शुरुआत

सर्वाइकल कैंसर को शिकस्त देने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके खिलाफ एचपीवी टीकाकरण शुरू करने की बात 2024 में अंतरिम बजट पेश करते हुए कही थी. अब जबकि सरकार 2025–26 का पूर्ण बजट पेश कर रही है, संभव है कि सरकार इस कार्यक्रम की शुरुआत कर दे. अगर सरकार ऐसा करती है, तो इसके दायरे में देश की 9–14 वर्ष की लड़कियां आएंगी और यह सरकार की महत्वकांक्षी योजना होगी. यह कैंसर के खिलाफ ना सिर्फ सरकार का बड़ा कदम होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में में बड़ा कदम होगा. वर्तमान स्थिति में यह टीकाकरण अभी सिर्फ प्राइवेट अस्पतालों में 3000 रुपए में किया जाता है.

महिला सम्मान सर्टिफिकेट योजना को विस्तार

सरकार ने दो साल पहले महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महिला सम्मान सर्टिफिकेट योजना की शुरुआत की थी. इस योजना में महिलाएं 1000 रुपए से निवेश कर सकती हैं और अधिकतम 2 लाख रुपए तक निवेश कर सकती हैं. इस योजना की डेडलाइन मार्च तक की है, जिसे सरकार इस बजट में बढ़ा देगी इसकी पूरी संभावना है.

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महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं की हो सकती है घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र के पहले दिन मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं यह चाहता हूं कि मां लक्ष्मी की कृपा गरीबों और मिडिल क्लास पर बरसती रहे. उनके इस बयान से यह साफ है कि सरकार इस बार भी महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं लेकर आएंगी. संभवत: महिलाओं की शिक्षा और पौष्टिक आहार को लेकर भी कुछ और घोषणाएं हों. 

महिलाओं के नेतृत्व में विकास संभव करने की कोशिश

मोदी सरकार महिलाओं के नेतृत्व में विकास की बात करती है, तभी तो नारी शक्ति का नारा दिया गया है. एमएसएमई और मुद्रा लोन देकर सरकार ने इसे काफी हद तक संभव भी किया है. संभव है कि इन क्षेत्रों में सरकार महिलाओं के लिए कुछ और घोषणाएं भी करें. मिशन शक्ति, मातृ वंदना योजना और जननी सुरक्षा योजना जैसे कार्यक्रमों में और सुविधाएं सरकार मुहैया करा सकती है,जो महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और जीवन स्तर उपलब्ध कराती है. पिछले साल के बजट में इन योजनाओं पर 3 लाख करोड़ की राशि आवंटित की गई थी, संभव है कि इस बार के बजट में यह राशि और बढ़ा दी जाए.

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नरेंद्र मोदी सरकार कौन सा टीकाकरण शुरू करने वाली है?

सर्वाइकल कैंसर के टीके HPV की शुरुआत नरेंद्र मोदी सरकार कर सकती है.

सबसे अधिक बार किस वित्तमंत्री ने बजट पेश किया है?

मोरारजी देसाई ने 8 पूर्ण और दो अंतरिम बजट यानी कुल 10 बार बजट पेश किया था. यह एक रिकाॅर्ड है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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