भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती

Indian Economy : एजेंसी के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है, पीएमआइ सर्वे और जुलाई में औद्योगिक उत्पादन इसकी ओर इशारा करते हैं. गौरतलब है कि व्यापारिक गतिविधियों का सूचक समग्र पीएमआइ सूचकांक अगस्त में 17 वर्ष के शिखर पर पहुंच गया, जबकि औद्योगिक उत्पादन चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया.

Indian Economy : अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया है, जो देश की आर्थिक मजबूती का ही प्रमाण है. इसने यह बदलाव मुख्य रूप से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मिली मजबूत आर्थिक वृद्धि और घरेलू मांग में आयी तेजी के कारण किया है. फिच के ‘ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक सितंबर’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी-मार्च की तिमाही में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर के मुकाबले अप्रैल-जून में विकास दर बढ़कर 7.8 फीसदी हो गयी, जो उसके जून में लगाये गये 6.7 प्रतिशत के अनुमान से कहीं अधिक है.

एजेंसी के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है, पीएमआइ सर्वे और जुलाई में औद्योगिक उत्पादन इसकी ओर इशारा करते हैं. गौरतलब है कि व्यापारिक गतिविधियों का सूचक समग्र पीएमआइ सूचकांक अगस्त में 17 वर्ष के शिखर पर पहुंच गया, जबकि औद्योगिक उत्पादन चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. फिच का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित जीएसटी सुधार उपभोक्ता खर्च और उससे आगे के क्षेत्रों में थोड़ा सुधार लायेंगे. इसका यह भी मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस साल के अंत तक विकास को गति देने के लिए रेपो दर में कटौती करेगा.

फिच ने हालांकि अभी तक भारत की सॉवरेन रेटिंग (सरकारी क्रेडिट रेटिंग) में बढ़ोतरी नहीं की है. जबकि ट्रंप द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत बताये जाने के बाद मजबूत अर्थव्यवस्था और विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन का हवाला देते हुए स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने 18 साल बाद भारत की रेटिंग बढ़ायी है. उल्लेखनीय है कि आइएमएफ, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक आदि ने भी अपनी रिपोर्टों में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के बने रहने को रेखांकित किया है.

फिच का हालांकि अनुमान है कि अगले दो वित्त वर्षों में भारत की आर्थिक विकास दर में थोड़ी कमी आ सकती है. इसने वित्त वर्ष 2026-27 में विकास दर 6.3 प्रतिशत और उसके अगले साल इसके 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. एजेंसी का कहना है कि अर्थव्यवस्था अभी अपनी पूरी क्षमता से कुछ ऊपर चल रही है, इसलिए आने वाले दिनों में भारत की आर्थिक विकास दर में थोड़ी कमी आने के आसार हैं. इसने अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते व्यापारिक तनाव से उत्पन्न खतरों की ओर इशारा करते हुए यह चेतावनी भी दी है कि टैरिफ के चलते बनी अनिश्चितता के कारण निवेश के माहौल पर बुरा असर पड़ सकता है.

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