Digital India : नयी दिल्ली स्थित भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में 16 से 20 फरवरी तक संयुक्त रूप से आयोजित हो रहा ‘इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट, 2026’ केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत की उस बदलती पहचान का प्रतीक है, जिसमें हमारा देश तकनीक के उपभोक्ता से निर्माता बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ अग्रसर हो रहा है. इस शिखर सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 300 से अधिक प्रदर्शनकर्ता, प्रसिद्ध वैश्विक तकनीकी नेताओं, सैकड़ों स्टार्टअप और हजारों शोधकर्ताओं व नीति विशेषज्ञों की मौजूदगी है.
यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2030 तक एआइ से लगभग 15 ट्रिलियन डॉलर का योगदान होने का अनुमान है. भारत इस परिवर्तन का केवल दर्शक नहीं, बल्कि उसका सक्रिय भागीदार और संभावित नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रहा है. यह सम्मेलन भारत की उस तैयारी और दृष्टि का प्रमाण है, जो उसे डिजिटल युग की अग्रिम पंक्ति में स्थापित कर रही है.
इस शिखर सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसमें भाग लेने वाली वैश्विक हस्तियों की उपस्थिति है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा, एनवीडिया और अन्य अग्रणी तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी तथा एआइ शोधकर्ता इस मंच पर अपने विचार साझा कर रहे हैं.
सम्मेलन में इन वैश्विक नेताओं की सक्रिय भागीदारी दर्शाती है कि भारत अब तकनीक का रणनीतिक साझेदार और भविष्य का केंद्र बन चुका है. इस प्रकार के मंच भारत को वैश्विक तकनीकी नीतियों और निवेश के केंद्र में स्थापित करते हैं और देश की तकनीकी साख को और मजबूत बनाते हैं. भारत की डिजिटल शक्ति का आधार उसकी मजबूत और व्यापक डिजिटल अवसंरचना है. आज देश में 138 करोड़ से अधिक आधार पहचान जारी हो चुकी हैं, जिसने लगभग पूरी आबादी को डिजिटल रूप से जोड़ दिया है. डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने नया रिकॉर्ड बनाया है. वर्ष 2025 में यूपीआइ के माध्यम से 180 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किये गये, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं.
रोज करीब 70 करोड़ डिजिटल भुगतान यह दर्शाते हैं कि तकनीक अब भारत में केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन चुकी है. वर्ष 2014 में जहां केवल 25 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 85 करोड़ से अधिक हो चुकी है. यह परिवर्तन तकनीकी विस्तार के साथ सामाजिक सशक्तीकरण की एक नयी कहानी है. तेजी से विस्तार कर रही भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान देश की जीडीपी का करीब 12 फीसदी है.
आने वाले वर्षों में इसके 20 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. देश का एआइ बाजार भी तेज गति से बढ़ रहा है और 2032 तक इसके 130 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है. नीति आयोग के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 500 अरब डॉलर से अधिक का योगदान कर सकती है. यानी एआइ भारत की आर्थिक शक्ति का नया आधार बन रहा है.
इस सम्मेलन से देश में निवेश, अनुसंधान और नवाचार को नयी गति मिलेगी.
अभी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां 1.25 लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और 110 से अधिक यूनिकॉर्न स्थापित हो चुके हैं. एआइ और डीप-टेक क्षेत्र में निवेश चूंकि लगातार बढ़ रहा है, लिहाजा ऐसे वैश्विक आयोजन देश में नये डाटा सेंटर, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और नवाचार केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करेंगे. इससे रोजगार के हजारों नये अवसर सृजित होंगे और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी. एआइ का लाभ आज समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच रहा है.
देश के 14 करोड़ से अधिक किसान अब एआइ आधारित तकनीकों के माध्यम से मौसम और फसल से संबंधित सटीक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हो रही है. स्वास्थ्य क्षेत्र में एआइ आधारित तकनीक गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक चरण में पता लगाने में सहायक हो रही है. एआइ आधारित शिक्षण प्रणाली देश के छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर प्रदान कर रही है.
भारतीय युवाओं के लिए यह समिट बेहद महत्वपूर्ण है. देश की करीब 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, और सालाना करीब 15 लाख इंजीनियर और तकनीकी स्नातक कार्यक्षेत्र में प्रवेश करते हैं. अभी देश में छह लाख से अधिक एआइ पेशेवर कार्यरत हैं, और इनकी संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है. यह समिट युवाओं को वैश्विक विशेषज्ञों से सीखने, नये कौशल विकसित करने और उन्हें नवाचार व उद्यमिता के जरिये रोजगार सृजन के लिए प्रेरित करेगा.
इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट का दृष्टिकोण व्यापक और मानवीय है. यह स्थानीय समस्याओं के लिए वैश्विक स्तर के समाधान विकसित करने पर जोर देता है और खासकर ग्रामीण भारत की चुनौतियों के लिए एआइ आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करता है, जिन्हें बाद में अन्य विकासशील देशों में भी लागू किया जा सकता है. इसके साथ समावेशी डिजिटल अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि तकनीक समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके. पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए एआइ के उपयोग, जैसे ऊर्जा दक्षता तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने पर भी चर्चा हो रही है.
भारतीय भाषाओं में एआइ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है, ताकि अंग्रेजी न जानने वाला व्यक्ति भी इस परिवर्तन का गवाह बन सके. सरकारी, निजी और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोगात्मक नवाचार को बढ़ावा देने तथा नागरिकों के डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी और सुरक्षित डाटा ढांचा विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है.
यह समिट भारत की तकनीकी परिपक्वता और उसके भविष्य के आत्मविश्वास का प्रतीक है. आज भारत में 138 करोड़ डिजिटल पहचान, 180 अरब वार्षिक डिजिटल लेनदेन, 85 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है. ये आंकड़े उस परिवर्तन के प्रमाण हैं, जिसने भारत को डिजिटल महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर कर दिया है. आने वाले वर्षों में जब भारत की विकास यात्रा को देखा जायेगा, तब इस समिट को उस मोड़ के रूप में याद किया जायेगा, जब भारत ने केवल तकनीक को अपनाया नहीं, बल्कि उसे दिशा देने का आत्मविश्वास भी प्राप्त किया. यही आत्मविश्वास भारत को दुनिया के डिजिटल भविष्य का नेतृत्व करने की क्षमता प्रदान करता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)
