India-Malaysia cooperation : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुआलालंपुर यात्रा के दौरान भारत-मलयेशिया संबंधों को नयी गति और स्पष्ट दिशा मिली. यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने दोनों देशों के बीच 2024 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की साझा इच्छा को स्पष्ट रूप से उजागर किया. प्रधानमंत्री मोदी का मलयेशिया में भव्य स्वागत तो हुआ ही, यात्रा के दौरान हुए उच्चस्तरीय संवाद और अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर इस बात का संकेत था कि द्विपक्षीय संबंध अब परिपक्वता के एक नये चरण में प्रवेश कर चुके हैं.
राजनीतिक स्तर पर दोनों देशों के नेतृत्व ने संबंधों की निरंतरता और रणनीतिक महत्व पर बल दिया. मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक को ‘अत्यंत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और निर्णायक बताया.’ यह टिप्पणी मलयेशिया की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है. दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि 1957 से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंध आज बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में नयी प्रासंगिकता प्राप्त कर रहे हैं.
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का एक प्रमुख मुद्दा रहा. दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता जतायी. भारत ने आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे व्यापार में संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. द्विपक्षीय स्तर पर मलयेशिया-भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति बनी.
इस दौरान मलयेशियाई उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत और 10वें मलयेशिया-भारत सीइओ फोरम में सहभागिता ने स्पष्ट किया कि दोनों देश विनिर्माण, सेवाओं, अवसंरचना, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देना चाहते हैं. तकनीकी सहयोग, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र इस यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम रहा. दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर सहयोग पर सहमति इस बात को दर्शाती है कि वे एक-दूसरे की क्षमताओं को पूरक मानते हैं. इसके साथ ही एआइ, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य नवाचार और खाद्य सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को भी महत्व दिया गया, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं.
रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद रोधी सहयोग पर भी व्यापक चर्चा हुई. दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा संवाद, संयुक्त अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की. आतंकवाद के सभी रूपों की संयुक्त रूप से निंदा करते हुए दोनों नेताओं ने शून्य सहिष्णुता की नीति दोहरायी. दोनों पक्षों ने कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद से निपटने, आतंक वित्तपोषण को रोकने और उभरती तकनीकों के आतंकवादी दुरुपयोग को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने का भी संकल्प लिया. संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी समन्वय बढ़ाने पर सहमति बनी. एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर चर्चा ने इस यात्रा के रणनीतिक महत्व को और रेखांकित किया.
भारत ने आसियान की केंद्रीय भूमिका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी, जिसे मलयेशिया सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं. दोनों देशों ने एशिया-प्रशांत में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था के समर्थन की साझा दृष्टि व्यक्त की. यह सहमति दर्शाती है कि भारत और मलयेशिया केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और समावेशी विकास को भी प्राथमिकता देते हैं. प्रधानमंत्री के दौरे में कुल 11 समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें रक्षा और सुरक्षा परिषद सहयोग, सेमीकंडक्टर साझेदारी, आपदा प्रबंधन, भ्रष्टाचार रोधी सहयोग, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में समन्वय, स्वास्थ्य और चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा सहयोग, कौशल विकास, ऑडियो-विजुअल सह-निर्माण, बिग कैट्स अलायंस और आयुर्वेद शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
इन समझौतों ने न केवल सहयोग के नये रास्ते खोले हैं, द्विपक्षीय संबंधों को संस्थागत रूप से भी मजबूत किया है. दोनों देशों के आम लोगों के बीच संपर्क समझौते का एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पक्ष रहा. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और मलयेशिया को जोड़ने वाले तमिल भाषा के साझा प्रेम को विशेष रूप से रेखांकित किया. मलयेशिया में तमिल भाषा की शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में गहरी उपस्थिति दोनों समाजों के ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है. ऑडियो-विजुअल समझौते के माध्यम से फिल्मों और संगीत, विशेष रूप से तमिल सिनेमा, के जरिये सांस्कृतिक निकटता बढ़ाने की उम्मीद जतायी गयी है.
ऐसे ही, मलयेशिया में भारतीय महावाणिज्य दूतावास की स्थापना, यूनिवर्सिटी मलाया में तिरुवल्लुवर केंद्र और मलयेशियाई छात्रों के लिए तिरुवल्लुवर छात्रवृत्तियों की घोषणा दीर्घकालिक सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग का संकेत है.
मलयेशिया में प्रधानमंत्री मोदी की प्रवासी भारतीय नेताओं से मुलाकात ने भी संबंधों को मानवीय आयाम दिया. उन्होंने मलयेशिया में भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की. आजाद हिंद फौज के एक पूर्व सैनिक से प्रधानमंत्री की भावनात्मक मुलाकात ने दोनों देशों के साझा ऐतिहासिक संघर्ष और सहयोग की स्मृति को जीवंत कर दिया. डिजिटल और वित्तीय सहयोग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई. भारत की एनपीसीआइ इंटरनेशनल और मलयेशिया की पेनेट के बीच सीमा पार डिजिटल भुगतान समझौता पर्यटन, व्यापार और प्रेषण को सरल बनायेगा.
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की मलयेशिया यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक सोच, आर्थिक साझेदारी, सुरक्षा सहयोग और सांस्कृतिक निकटता पर आधारित हैं. व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पुनः पुष्टि और ठोस पहल इस बात का संकेत हैं कि भारत और मलयेशिया बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक-दूसरे को दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं. प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नयी ऊंचाई पर पहुंचाया, बल्कि यह भारत की दक्षिण-पूर्व एशिया नीति और मलयेशिया की बहुआयामी विदेश नीति के बीच गहराते तालमेल को भी रेखांकित करती है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
