सबरीमाला मंदिर में चोरी की कहानी साल 1998 से शुरू होती है. उस समय जाने-माने इंडस्ट्रियलिस्ट विजय माल्या ने मंदिर के लिए 30 किलो 300 ग्राम सोना और 1,900 किलो तांबा दान किया था. यह सोना मंदिर की सजावट और सोने की प्लेटिंग के काम में इस्तेमाल होना था. सालों बाद जब मंदिर में जांच हुई, तो पता चला कि दान किए गए सोने और जो इस्तेमाल हुआ उसका हिसाब नहीं मिला. यह पहली बार सवाल उठने का कारण बना.
साल 2019 में फिर हुई चोरी
2019 में एक बड़ा मामला सामने आया. मंदिर से करीब 4.5 Kg सोना चोरी हो गया. चोरी का तरीका भी बड़ा चालाकी भरा था. मंदिर की सजावट और सोने की प्लेटिंग के बहाने यह सोना बाहर निकाला गया. लेकिन असल में वह चोरी किया जा रहा था. इस चोरी में मुख्य रूप से मंदिर के अंदर की मूर्तियां और द्वारपालक की सोने की चीजें शामिल थीं.
हाई कोर्ट ने बनाई SIT
जांच के लिए केरल हाई कोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई, जो मंदिर के अंदर से सबूत जुटा रही थी. लेकिन सवाल यह भी उठे कि चोरी के पैसे और सोने की असली इस्तेमाल कहां हुआ? मामला आगे बढ़ने पर इसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपा गया. अब मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को ED ने छापा मारा है. इसमें केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में 21 जगहों पर एक साथ तलाशी ली गई. मुख्य आरोपियों के घरों पर रेड पड़ी, इनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं. जैसे-
- उन्नीकृष्णन पोट्टी- मुख्य आरोपी
- मुरारी बाबू (CPI(M) नेता)
- ए. पद्मकुमार
- एन. वासु
- सोने का व्यापारी गोवर्धन और पंकज भंडारी
इसके अलावा, चेन्नई में Smart Creations और बेल्लारी के गोवर्धन के घर पर भी तलाशी हुई. आरोप है कि चोरी का सोना इन्हीं जगहों पर पिघलाकर और छुपाकर रखा गया. केरल में ईडी ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के हेडक्वार्टर में भी तलाशी ली. इसके साथ ही उन्नीकृष्णन पोट्टी के घर तिरुवनंतपुरम और बेंगलुरु में, मुरारी बाबू के कोट्टायम वाले घर, एन वासु के पेट्टा में स्थित घर और ए. पद्मकुमार के घर अरनमुला पर भी छापेमारी हुई.
इन मामलों के जांच में लगी ED
ईडी अब पैसे के सोर्स, लेन-देन और छुपाई गई संपत्ति की जांच कर रही है. अगर कहीं ज्यादा संपत्ति मिलती है, तो उसे अटैच किया जा सकता है. साथ ही, केरल हाई कोर्ट ने SIT को आदेश दिया है कि मंदिर में जाकर सबूत जुटाए जाएं. कोर्ट ने यह भी ऑर्डर दिया कि चोरी की साजिश कैसे बनाई गई, इसका भी पता लगाया जाए.
यह किसी आम जगह से केवल सोने की चोरी का मामला नहीं है. यह विश्वास, दान और पैसों के गलत इस्तेमाल की वजह से आम लोगों के लिए काफी इमोशनल मामला भी है. पहले SIT और ED भी इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं.
