राम मंदिर चंदा मामला: केजरीवाल ने SIT पर उठाया सवाल, कहा- चोरों को बचाने की हो रही कोशिश

Ram Mandir Donation Case: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में हेराफेरी की जांच के लिए बनाए गए SIT पर सवाल उठाया है.

Ram Mandir Donation Case: केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इस एसआईटी के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है और इसे कथित चंदा चोरी में शामिल लोगों को बचाने के लिए बनाया गया था. केजरीवाल का यह बयान एसआईटी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपने के एक दिन बाद आया है.

किस कानून के तहत यह एसआईटी बनाई गई है? : केजरीवाल

आप के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा, एसआईटी के पास कोई अधिकार नहीं हैं. यह न तो किसी को समन भेज सकती है, न ही किसी को गिरफ्तार कर सकती है और न ही छापेमारी कर सकती है. अगर कोई प्राथमिकी नहीं है, तो किस कानून के तहत यह एसआईटी बनाई गई है? आप नेता ने आरोप लगाया कि इस जांच का इस्तेमाल मुद्दे से ध्यान भटकाने और मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई में देरी करने के लिए किया जा रहा है.

लोग कुछ ही दिनों में इस एसआईटी के बारे में भी भूल जाएंगे : केजरीवाल

केजरीवाल के अनुसार, 2021 में अयोध्या में जमीन की खरीद-फरोख्त में राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों के शामिल होने के आरोप सामने आने के बाद इसी तरह की एक एसआईटी बनाई गई थी. उन्होंने कहा, तब भी एक एसआईटी बनाई गई थी. कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और आज उस जांच का कोई अता-पता नहीं है. लोग कुछ ही दिनों में इस एसआईटी के बारे में भी भूल जाएंगे. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच निचले स्तर के अधिकारियों पर केंद्रित लग रही है, जबकि बड़े फैसलों के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है.

केजरीवाल ने पूछा- मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया?

केजरीवाल ने कहा- अगर असली दोषियों की पहचान करने की सच्ची मंशा है, तो जांच ऊंचे ओहदे वाले लोगों तक पहुंचनी चाहिए. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया. उन्होंने पूछा, अगर मकसद सच का पता लगाना है, तो मामले को सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय को क्यों नहीं सौंपा गया? अब तक कोई प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई? केजरीवाल ने कहा कि सनातन धर्म के कई श्रद्धालु और अनुयायी इन आरोपों के बारे में जवाब मांग रहे हैं और मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

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By Arbindkumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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