Ram Mandir Donation Case: केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इस एसआईटी के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है और इसे कथित चंदा चोरी में शामिल लोगों को बचाने के लिए बनाया गया था. केजरीवाल का यह बयान एसआईटी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपने के एक दिन बाद आया है.
किस कानून के तहत यह एसआईटी बनाई गई है? : केजरीवाल
आप के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा, एसआईटी के पास कोई अधिकार नहीं हैं. यह न तो किसी को समन भेज सकती है, न ही किसी को गिरफ्तार कर सकती है और न ही छापेमारी कर सकती है. अगर कोई प्राथमिकी नहीं है, तो किस कानून के तहत यह एसआईटी बनाई गई है? आप नेता ने आरोप लगाया कि इस जांच का इस्तेमाल मुद्दे से ध्यान भटकाने और मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई में देरी करने के लिए किया जा रहा है.
लोग कुछ ही दिनों में इस एसआईटी के बारे में भी भूल जाएंगे : केजरीवाल
केजरीवाल के अनुसार, 2021 में अयोध्या में जमीन की खरीद-फरोख्त में राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों के शामिल होने के आरोप सामने आने के बाद इसी तरह की एक एसआईटी बनाई गई थी. उन्होंने कहा, तब भी एक एसआईटी बनाई गई थी. कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और आज उस जांच का कोई अता-पता नहीं है. लोग कुछ ही दिनों में इस एसआईटी के बारे में भी भूल जाएंगे. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच निचले स्तर के अधिकारियों पर केंद्रित लग रही है, जबकि बड़े फैसलों के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है.
केजरीवाल ने पूछा- मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया?
केजरीवाल ने कहा- अगर असली दोषियों की पहचान करने की सच्ची मंशा है, तो जांच ऊंचे ओहदे वाले लोगों तक पहुंचनी चाहिए. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया. उन्होंने पूछा, अगर मकसद सच का पता लगाना है, तो मामले को सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय को क्यों नहीं सौंपा गया? अब तक कोई प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई? केजरीवाल ने कहा कि सनातन धर्म के कई श्रद्धालु और अनुयायी इन आरोपों के बारे में जवाब मांग रहे हैं और मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
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