राज्यसभा में उप सभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, कृषि बिल पास होने से नाराज है विपक्ष

Opposition parties submit a no confidence motion against Rajya Sabha deputy chairman Harivansh : राज्यसभा में आज भारी हंगामे के बीच किसानों से संबंधित दो बिल पास हो गया. जिस वक्त यह बिल पास हुआ राज्यसभा में हंगामा जारी था. दोनों बिल को राज्यसभा से ध्वनिमत से पारित किया गया है. बिल के पास होने के बाद विपक्ष राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है. कांग्रेस सांसद अहमद पटेल ने कहा कि उप सभापति को लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और परंपराओं को नुकसान पहुंचाया. इसी वजह से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है.

नयी दिल्ली : राज्यसभा में आज भारी हंगामे के बीच किसानों से संबंधित दो बिल पास हो गया. जिस वक्त यह बिल पास हुआ राज्यसभा में हंगामा जारी था. दोनों बिल को राज्यसभा से ध्वनिमत से पारित किया गया है. बिल के पास होने के बाद विपक्ष राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है. कांग्रेस सांसद अहमद पटेल ने कहा कि उप सभापति को लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और परंपराओं को नुकसान पहुंचाया. इसी वजह से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है.

बिल पास होने से पहले विपक्ष ने सदन में भारी हंगाम किया. हंगामे के बीच कई माइक भी तोड़े गये हैं. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने दोनों विधेयकों को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की थी, जिसे उपसभापति ने स्वीकार नहीं किया. जिसके बाद ब्रायन ने यह आरोप लगाया कि सरकार ने इन विधेयकों के संबंध में राज्यों से मशविरा नहीं किया गया. यह लोकतंत्र की हत्या है.

आज राज्यसभा से कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 पारित हुआ. दोनों विधेयकों ध्‍वनिमत से पारित गया है. बिल का विरोध कर रहे सांसद सांसद वेल में आ गये थे. वहीं बिल के पास होने के बाद जहां सत्ता पक्ष ने इसका स्वागत किया है वहीं विपक्षी इसका विरोध कर रहे हैं और 12 सांसद धरना पर भी बैठ गये हैं.

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जद (यू) के आरसीपी सिंह ने राम चंद्र प्रसाद सिंह ने विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा कि लंबे समय बाद किसानों के लिए कोई नीति आयी है. उन्होंने कहा कि 1991 में देश में उदारीकरण की शुरूआत की गई लेकिन कृषि सुधार नहीं हो सका. उन्होंने बिहार का हवाला दिया जहां नीतीश कुमार सरकार ने 2006 में एपीएमसी कानून को समाप्त कर दिया था और उसके बाद भी किसानों को एमएसपी के माध्यम से अच्छा मूल्य मिल रहा है.

Posted By : Rajneesh Anand

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