ओडिशा के भद्रक जिले के धामनगर ब्लॉक से सामने आया एक वीडियो बाढ़ के बीच इंसानियत और हिम्मत की तस्वीर दिखा रहा है.
चारों तरफ पानी था और रास्ता कहीं नजर नहीं आ रहा था. इसी बीच मदद की पुकार सुनकर आशा कार्यकर्ता मिंटी साहू बाढ़ के पानी में उतर गईं. सामने 60 साल की बुजुर्ग महिला थीं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का कोई रास्ता नहीं था. जिसके बाद मिंटी ने बिना देर किए महिला को अपने कंधे पर उठाया और बाढ़ के पानी के बीच आगे बढ़ गईं.
महिला के घर में घुस गया था बाढ़ का पानी
भारी बारिश के बाद धामनगर ब्लॉक के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया है. कई इलाकों में घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया. इसी दौरान 60 वर्षीय महिला के घर में भी पानी घुस गया. महिला को मदद की जरूरत होने पर मिंटी साहू को SOS मिला. वह तुरंत बाढ़ के पानी के बीच वहां पहुंचीं. जब उन्हें महिला को बाहर निकालने का कोई रास्ता नहीं मिला, तो उन्होंने महिला को अपने कंधे पर उठा लिया और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया.
1.07 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
मिंटी साहू की यह कोशिश ऐसे समय में सामने आई है, जब भद्रक जिले के कई इलाकों में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. धामनगर, भंडारीपोखरी, तिहिड़ी और चांदबली ब्लॉक बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं. यहां करीब 1.96 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 1.07 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.
छह जिलों में 12.85 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
मिंटी साहू की तरह ही ओडिशा के हजारों लोग इस समय बाढ़ के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, केंद्रापड़ा और क्योंझर समेत छह जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं. पीटीआई के रिपोर्ट के अनुसार इन जिलों में करीब 12.85 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं.
उत्तर ओडिशा में सुबर्णरेखा नदी का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है. 20 अगस्त को नदी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी. हालांकि बारिश में कमी के बाद कुछ इलाकों में हालात सुधरने के संकेत मिले हैं, लेकिन कई जगहों पर पानी अब भी जमा है और लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं.
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बाढ़ के कारण बंद हैं बच्चों के स्कूल
बाढ़ का असर सिर्फ घरों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है. भद्रक के कई इलाकों में बाढ़ और भारी बारिश को देखते हुए 21 अगस्त को स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है. प्रशासन ने छात्रों और स्कूल कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है.
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बाढ़ का पानी कुछ इलाकों में धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन हजारों लोगों के लिए मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. ऐसे वक्त में मिंटी साहू जैसी जमीनी स्तर की कार्यकर्ताओं की कोशिशें यह दिखाती हैं कि आपदा के बीच मदद का एक हाथ किसी के लिए जिंदगी बचाने वाली उम्मीद बन सकता है.
