निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ पेश किया निष्कासन मोशन, गिनाए पुराने उदाहरण

Rahul Gandhi: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को निष्काषित करने वाला सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी, जिसमें पार्लियामेंट के पुराने उदाहरण भी दिए.

Rahul Gandhi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है. यह लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद से निष्कासित करने की मांग वाला मोशन है. दुबे का कहना है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य ‘देश को टुकड़ों में बांटने की मंशा रखने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग की सच्चाई को उजागर करना’ है. उन्होंने यह भी दावा किया कि संसद पहले भी इसी तरह के प्रस्तावों के जरिए सांसदों को निष्कासित कर चुकी है और इस प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी भी मिल चुकी है. 

दुबे के प्रस्ताव के साथ जारी विवरण में अनुशासनहीनता के मामलों में पहले किए गए निष्कासन का उल्लेख है, जिनमें सुब्रमण्यम स्वामी, छत्रपाल सिंह लोधा और स्वामी साक्षी जी महाराज के नाम शामिल हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दुबे ने लिखा, ‘संसद समय-समय पर सब्सटेंटिव मोशन के जरिए सदस्यों को निष्कासित करती रही है. खास तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ऐसा किया है- कभी राज्यसभा में सुब्रमण्यम स्वामी जी, कभी छत्रपाल लोधी जी और कभी साक्षी महाराज जी के मामले में. सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में संसद की इस प्रक्रिया को सही ठहराया है. राहुल गांधी जी के खिलाफ मैंने जो प्रस्ताव पेश किया है, वह देश को तोड़ने की साजिश रचने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग की मंशा को उजागर करेगा. अंतिम फैसला संसद ही करेगी.’

इससे पहले शनिवार को भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई थी. विवाद का केंद्र इस समझौते का भारत के विशाल वस्त्र उद्योग और लाखों कपास किसानों पर पड़ने वाला असर है. राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर टैरिफ प्रावधानों को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि यह समझौता कपास किसानों और वस्त्र निर्यातकों के लिए नुकसानदेह साबित होगा.

इसके जवाब में भाजपा नेता ने गांधी के दावों को गलत बताते हुए कहा कि कपास उत्पादन और टेक्सटाइल मिलों को लेकर उनकी बातें तथ्यहीन हैं. उन्होंने किसी भी मंच पर खुली बहस की चुनौती भी दी. बाद में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दुबे ने राहुल गांधी की और कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ‘महामूर्ख’ नेता प्रतिपक्ष कहा और किसानों के हितों की रक्षा तथा निर्यात बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार के कदमों का बचाव किया.

सब्सटेंटिव मोशन क्या होता है?

सब्सटेंटिव मोशन एक स्वतंत्र, पूर्ण और औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसे सदन में किसी निर्णय या राय को व्यक्त करने के लिए पेश किया जाता है. इसके लिए विधायी सदन या विधानसभा की स्वीकृति आवश्यक होती है. यह किसी विशेष कार्रवाई की मांग के लिए लाया जा सकता है, जैसे किसी सांसद से जुड़े आरोपों या आचरण की जांच के लिए एक समिति का गठन. यह प्रिविलेज मोशन से अलग होता है.

प्रिविलेज मोशन से क्या अंतर है?

संसदीय विशेषाधिकार संसद सदस्यों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से इसलिए प्रदान किए जाते हैं, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने दायित्वों का सही और प्रभावी ढंग से पालन कर सकें. इन अधिकारों या संरक्षणों का उल्लंघन होने की स्थिति को विशेषाधिकार हनन (ब्रिच ऑफ प्रिविलेज) कहा जाता है, जो संसदीय कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध है. ऐसे मामलों में संबंधित सदन का कोई भी सदस्य, दोषी माने जा रहे व्यक्ति के विरुद्ध प्रिविलेज मोशन का नोटिस प्रस्तुत कर सकता है. 

सब्सटेंटिव मोशन की क्या प्रक्रिया होती है?

संसदीय नियमों के मुताबिक, किसी भी ऐसे प्रस्ताव को मंजूर करना और उसे सदन में रखने या न रखने का फैसला पीठासीन अधिकारी करता है. प्रस्ताव लाने का नोटिस महासचिव को दिया जाता है, क्योंकि यही सभी संसदीय नोटिस देने की सामान्य प्रक्रिया है.

अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है और बाद में सदन भी इसे मंजूरी दे देता है, तो लोकसभा अध्यक्ष आरोपों की जांच के लिए एक समिति बना सकते हैं. इस समिति को तय समय के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी होती है. रिपोर्ट लोकसभा में पेश होने के बाद, एक और प्रस्ताव लाया जाता है, जिसमें सदन यह तय करता है कि समिति की सिफारिशों पर क्या कदम उठाया जाए.

गंभीर गलत आचरण या संसद की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में लोकसभा के पास अपने किसी भी सदस्य को सदन से निष्काषित करने का अधिकार भी होता है.

सब्सटेंटिव मोशन के जरिए पहले भी नेता निष्काषित किए गए

2005 में एक संसदीय जांच समिति ने पाया कि कम से कम 10 लोकसभा सदस्यों ने सवाल पूछने के बदले पैसे लिए थे. इसके बाद उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया गया.

2005 में MPLADS में एक टीवी चैनल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के क्रियान्वयन में कुछ लोकसभा सदस्यों पर अनुचित आचरण के आरोप लगाए. सात सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद, तत्कालीन स्पीकर ने 18 मार्च 2006 को संबंधित सांसदों को चार दिनों के लिए निलंबित कर दिया.

मई 2007 में, लोकसभा अध्यक्ष ने सांसद बाबूभाई के. कटारा की गिरफ्तारी की जांच के लिए एक समिति गठित की. उन पर अपनी पत्नी और बेटे के पासपोर्ट का इस्तेमाल कर एक महिला और एक बच्चे को अवैध रूप से विदेश ले जाने की कोशिश का आरोप था. उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई और अक्टूबर 2008 में उन्हें निष्कासित कर दिया गया.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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