वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में देश के युवाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बात की. जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के संदर्भ में उन्होंने पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा से रोजगार तक पहुंचने में आ रही चुनौतियों पर अपनी बात रखी.
सीतारमण से सवाल किया गया कि जब आपने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन देखा तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी? क्या आपको लगा कि यह प्रदर्शन सिर्फ NEET पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित था? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब इतनी कम उम्र के युवा एक जगह जुटकर प्रदर्शन करते हैं, तो उनकी समस्याएं किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रह सकतीं. सीतारमण ने कहा कि 16 से 26 साल की उम्र बेहद महत्वपूर्ण और बदलावों से भरी होती है. इस उम्र में युवाओं के सामने पढ़ाई, परीक्षा, रोजगार और करियर को लेकर कई तरह की चिंताएं और उम्मीदें होती हैं.
हर युवा के लिए जरूरी नहीं कि वह किसी कंपनी में नौकरी ही करे : सीतारमण
एक सवाल के जवाब में निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज कई युवा ऐसे कोर्स करते हैं, जिनकी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी नहीं मिलती. हैरानी की बात यह है कि ये कोर्स युवाओं को अपना काम या कारोबार शुरू करने के लिए भी पर्याप्त रूप से तैयार नहीं करते. उन्होंने कहा कि हर युवा के लिए जरूरी नहीं कि वह किसी कंपनी में नौकरी ही करे, वह खुद भी कुछ शुरू कर सकता है.
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विकसित देशों का उदाहरण सीतारमण ने दिया
विकसित देशों का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि वहां युवाओं को उनकी रुचि के विषय में उच्च शिक्षा या किसी तकनीकी विश्वविद्यालय में पढ़ाई का विकल्प मिलता है. वहां उन्हें सिर्फ एक हुनर नहीं सिखाया जाता, बल्कि यह भी बताया जाता है कि उस हुनर से आगे रोजगार या कारोबार के कौन-कौन से रास्ते खुल सकते हैं.
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शिक्षा को रोजगार से जोड़ना जरूरी : वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने कहा कि पढ़ाई ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को नौकरी या अपना काम शुरू करने के लिए तैयार करे. उन्हें यह भी समझना चाहिए कि किसी हुनर के साथ आगे बढ़कर वे कितना कमा सकते हैं और अपने काम को कैसे संभाल सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों में अक्सर ऐसा नहीं होता. यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को सिर्फ डिग्री मिल जाती है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने अर्थशास्त्र या राजनीति विज्ञान से बीए किया, तो उसके सामने सवाल होता है कि इसके बाद क्या करें? आम तौर पर वह एमए करता है, लेकिन एमए के बाद भी करियर का रास्ता साफ नहीं होता. सीतारमण ने कहा कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ना जरूरी है.
